यूपी विधानमंडल सत्र में कोडीन सिरप और स्वास्थ्य सेवाओं पर सियासी संग्राम

उत्तर प्रदेश न्यूज़

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की शुरुआत विपक्ष और सरकार के बीच तीखी तकरार के साथ हुई। कोडीन कफ सिरप के अवैध कारोबार का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया। समाजवादी पार्टी ने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग की।

सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त इलाज और जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। डॉक्टरों द्वारा बाहर की दवाएं लिखे जाने और जांचों में अवैध वसूली के आरोपों ने सरकार को असहज स्थिति में डाल दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं पर विपक्ष का हमला

विपक्ष का कहना है कि जब सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो गरीब और मध्यम वर्ग के लोग इलाज कैसे कराएंगे। एमआरआई जैसी जरूरी जांच मशीनों के खराब होने से मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर जाना पड़ रहा है, जहां इलाज महंगा है।

सरकार का पक्ष और जवाब

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने दावा किया कि कोडीन सिरप से प्रदेश में किसी की मौत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के सरकार को बदनाम कर रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मामले की जांच कई एजेंसियां कर रही हैं और दोषियों पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट कानून

सत्र के दौरान श्री बांके बिहारी जी मंदिर ट्रस्ट अधिनियम-2025 पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि यह कानून मंदिर प्रशासन को मजबूत करेगा और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। विपक्ष ने इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की।

भाजपा की रणनीति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा विधायकों को विपक्ष के सवालों का ठोस और तथ्यात्मक जवाब देने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अनुपूरक बजट और जनहित से जुड़े सभी मुद्दों पर सदन में खुलकर चर्चा होगी।

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