गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दरबार के माध्यम से यह संदेश दिया कि शासन की असली पहचान जनता से जुड़कर ही बनती है। दूर-दराज़ जिलों से आए फरियादियों की समस्याएं सुनते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि हर शिकायत का समाधान तय समयसीमा में सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया कि उत्तर प्रदेश पिछले साढ़े आठ वर्षों में सेवा और विश्वास के रास्ते पर आगे बढ़ा है। शासन और जनता के बीच संवाद ने प्रदेश के विकास को नई गति दी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव की कहानी
जनता दरबार के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी के 54वें वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे में आए बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पहले जहां मेडिकल सुविधाएं सीमित थीं, वहीं अब प्रदेश में 80 मेडिकल कॉलेज कार्यरत हैं। हर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है, जिससे गरीब और जरूरतमंदों को राहत मिली है।
आस्था, इतिहास और आधुनिकता का संगम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रयागराज महाकुंभ, काशी, अयोध्या और सारनाथ जैसे स्थल राज्य को वैश्विक पहचान दिलाते हैं। अयोध्या को सौर नगर के रूप में विकसित करना आधुनिक सोच और परंपरा का अनूठा उदाहरण है।
उन्होंने ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि झांसी की रानी, काकोरी कांड और चौरी चौरा जैसे आंदोलन उत्तर प्रदेश की मिट्टी में जन्मे, जिसने देश के इतिहास को दिशा दी।
बीमारू से विकसित राज्य की ओर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी बीमारू राज्य कहलाने वाला उत्तर प्रदेश आज राजस्व अधिशेष वाले राज्यों में शीर्ष तीन में शामिल है। आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री राहत कोष और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश ने राज्य की तस्वीर बदली है। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलन और जनता दरबार विकास की इसी निरंतर यात्रा का हिस्सा हैं।