प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचकर काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मां गंगा को नमन किया। बाबा विश्वनाथ के दरबार में पीएम मोदी की उपस्थिति से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब गया। मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” और “जय श्री राम” के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।
प्रधानमंत्री लगभग 55 मिनट तक काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में रहे। इस दौरान उन्होंने गर्भगृह में सात से आठ मिनट तक विशेष पूजा की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक और पूजन किया गया। इसके साथ ही उन्होंने माता अन्नपूर्णा, भारत माता मंदिर और आदि शंकराचार्य को भी प्रणाम कर आशीर्वाद लिया।
पूजा-अर्चना के बाद पीएम मोदी गंगा द्वार तक पहुंचे, जहां उन्होंने मां गंगा को नमन किया। इसी दौरान उन्होंने हाल ही में स्थापित वैदिक घड़ी का भी अवलोकन किया। इस घड़ी को भारतीय संस्कृति और वैदिक समय गणना के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने काशी विश्वनाथ घाट पर लगाए गए आधुनिक एयर प्यूरीफायर सिस्टम का भी निरीक्षण किया। यह विशेष सिस्टम मणिकर्णिका घाट के आसपास की वायु को शुद्ध करने के उद्देश्य से लगाया गया है। पीएम मोदी ने अधिकारियों से इस तकनीक की कार्यप्रणाली और इसके प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी ली।
मंदिर प्रशासन की ओर से प्रधानमंत्री का पारंपरिक सम्मान भी किया गया। उन्हें गुलाबी मीनाकारी से तैयार काशी विश्वनाथ मंदिर का सुंदर मॉडल भेंट किया गया। साथ ही भगवान विश्वनाथ को अर्पित किया जाने वाला विशेष शाल भी उन्हें दिया गया, जिस पर “जय विश्वनाथ” अंकित था और उसमें रुद्राक्ष की मालाएं लगी थीं। इसके अतिरिक्त भगवान शिव के प्रतीक त्रिशूल और डमरू भी उन्हें भेंट स्वरूप प्रदान किए गए।
इससे पहले बुधवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में भव्य रोड शो भी किया। यह रोड शो बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (BLW) से शुरू होकर लहरतारा, कचहरी, आंबेडकर चौराहा, चौकाघाट, तेलियाबग, लहुराबीर और मैदागिन होते हुए काशी विश्वनाथ धाम तक पहुंचा।
रोड शो के दौरान सड़क के दोनों ओर भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। लोगों ने फूल बरसाकर और जयकारे लगाकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
मंदिर से बाहर निकलते समय भक्तों ने जोरदार “हर हर महादेव” के उद्घोष किए। प्रधानमंत्री ने भी हाथ हिलाकर और हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया। वाराणसी में उनका यह दौरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक जुड़ाव और जनसंपर्क का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया।