उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एक विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज 8 साल पुराने मानहानि मामले में अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले से पूरी तरह बरी कर दिया है। यह बहुचर्चित मामला वर्ष 2018 में केंद्रीय गृह मंत्री और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा हुआ था, जिसे लेकर स्थानीय भाजपा नेता द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया था। फैसले के दिन राहुल गांधी की व्यक्तिगत पेशी को देखते हुए कचहरी परिसर और पूरे जिला मुख्यालय पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे।
क्या था पूरा मामला और कब क्या हुआ?
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शिकायत और टिप्पणी: भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को यह परिवाद दायर किया था। आरोप था कि मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ विवादित बयान दिया था।
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कानूनी प्रक्रिया: 27 नवंबर 2023 को कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया था, जिसके बाद वह अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई थी। इस पूरे कानूनी सफर के दौरान मामले में कई याचिकाएं और रिवीजन पिटीशन निचली अदालतों से लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट तक दाखिल हुईं। फैसले के इस दिन राहुल गांधी चौथी बार व्यक्तिगत रूप से सुल्तानपुर कोर्ट में उपस्थित हुए।
बिहार में मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर सियासी पारा गरम
सुल्तानपुर कोर्ट के इस फैसले के बीच, रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा बिहार के पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार/पिता को लेकर दिए गए एक विवादित बयान पर राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने खरगे के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे ‘गुंडों वाली भाषा’ करार दिया है और इसे लेकर कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है।