संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की तीसरी समिति में अल्पसंख्यक मुद्दों पर आयोजित एक विशेष संवाद सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जमकर आड़े हाथों लिया। भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान द्वारा भारत की छवि धूमिल करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने के प्रयासों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने पाकिस्तान की जर्जर अर्थव्यवस्था, आंतरिक अराजकता और मानवाधिकार उल्लंघनों का पर्दाफाश करते हुए कहा कि पाकिस्तानी सरकार केवल एक मुखौटा है और असली कमान वहाँ की सेना के हाथों में है।
‘फॉर्म 47 सरकार’ और सेना का वास्तविक नियंत्रण
भारतीय कूटनीतिज्ञ ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए इसे सेना-संचालित बताया:
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‘फॉर्म 47’ का संदर्भ: पाकिस्तान में ‘फॉर्म 47’ एक चुनावी दस्तावेज होता है जो मतदान के अनंतिम नतीजों को दर्शाता है। फरवरी 2024 के आम चुनावों में हुई भीषण धांधली के बाद वहां की सरकार को ‘फॉर्म 47 सरकार’ कहा जाता है।
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सैन्य दबदबा: रघु पुरी ने कहा कि यह कठपुतली सरकार किसी भी कीमत पर पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के निर्देशों को दरकिनार नहीं कर सकती। पाकिस्तान के शासन में सेना का प्रभाव सर्वोपरि और निर्णायक है।
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आंतरिक संकट से ध्यान भटकाने की चाल: खैबर पख्तूनख्वा से लेकर बलूचिस्तान तक हो रहे मानवाधिकार हनन और ढहती अर्थव्यवस्था से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ही पाकिस्तान भारत के खिलाफ दुष्प्रचार का सहारा लेता है।
अल्पसंख्यकों के गिरते आंकड़ों पर पाकिस्तान को घेरा
अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए भारत ने निम्नलिखित बिंदु रखे:
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घटती आबादी: आजादी के समय से लेकर आज तक पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की आबादी में भारी और उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो वहां के दमनकारी रवैये का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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निजी सलाह: भारत ने पाकिस्तानी प्रतिनिधियों को सलाह दी कि वे दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपने देशवासियों की आवाज सुनें और सबसे पहले अपने नागरिकों की भलाई पर ध्यान दें।
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आंतरिक संप्रभुता: भारत ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना संबंधित देश की संप्रभु जिम्मेदारी है, और भारत बहुपक्षीय मंचों पर पारदर्शी संवाद के लिए हमेशा तैयार है।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का दोटूक रुख
पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार जम्मू-कश्मीर का राग अलापने पर भारत ने अपना रुख एक बार फिर पूरी स्पष्टता से सामने रखा:
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अभिन्न अंग: जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा।
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अवैध कब्जा खाली करना ही एकमात्र मुद्दा: अब केवल पाकिस्तान के गैर-कानूनी कब्जे वाले भारतीय भूभाग (PoK) को खाली कराया जाना ही एकमात्र लंबित विषय बचा है।
भारत की विविधता और समावेशी लोकतंत्र पर गर्व
संबोधन के अंत में रघु पुरी ने भारत की प्राचीन सभ्यता और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा:
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विविधता में एकता: भारत दुनिया का सबसे बड़ा बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुभाषी समाज है, जिसकी नींव में ही सर्वधर्म समभाव की भावना है।
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उच्च पदों पर योगदान: भारत के अल्पसंख्यकों ने राष्ट्रपति, सैन्य प्रमुखों, न्यायपालिका, कॉर्पोरेट और फिल्म उद्योग जैसे सर्वोच्च पदों पर आसीन होकर देश के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया है—जबकि पाकिस्तान के इतिहास में ऐसे उदाहरण ढूँढना भी असंभव है।