उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित सिविल और जिला अदालत परिसर के बाहर रविवार को नगर निगम की टीम ने अवैध रूप से बने वकीलों के चैंबरों पर बुलडोजर की कार्रवाई की। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही इस कार्रवाई के दौरान कचहरी परिसर और आसपास के इलाके में भारी तनाव देखने को मिला। बुलडोजर कार्रवाई का पुरजोर विरोध करते हुए कई वकील सड़कों पर लेट गए, जिससे स्थिति काफी संवेदनशील हो गई।
211 अवैध चैंबर चिह्नित, भारी पुलिस और PAC की मौजूदगी
अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई:
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विशाल सुरक्षा घेरा: मौके पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एडीसीपी, एसीपी और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ पीएसी (PAC) और कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई।
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211 ढांचों पर कार्रवाई: नगर निगम ने कुल 211 अवैध चैंबरों को ध्वस्त करने के लिए चिह्नित किया था। ये ढांचे सार्वजनिक रास्तों, सरकारी जमीन और नालों के ऊपर बनाए गए थे, जिन पर लाल रंग से क्रॉस के निशान लगाए गए थे।
हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, खारिज हुई याचिकाएं
कार्रवाई से पूर्व वकीलों ने विधिक रास्तों का सहारा लिया था, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिल सकी:
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अपील खारिज: नगर निगम की नोटिस के खिलाफ वकील हाई कोर्ट पहुँचे थे, जहाँ अदालत ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश को बरकरार रखा।
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आपत्तियों का निस्तारण: मई से अगस्त के बीच दो चरणों में 72 अवैध चैंबरों को पहले ही गिराया जा चुका था। नोटिस के खिलाफ आई 14 आपत्तियों का वैधानिक निस्तारण करने के बाद ही इस अभियान को आगे बढ़ाया गया। पूर्व में यह कार्रवाई 11 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, जिसे आपत्तियों की समीक्षा के चलते टाल दिया गया था।
पूर्व में हुए पथराव और लाठीचार्ज का इतिहास
कैसरबाग कचहरी के पास अवैध निर्माणों को हटाने का यह विवाद काफी समय से चला आ रहा है:
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17 मई की हिंसक झड़प: इससे पहले 17 मई को जब नगर निगम की टीम बुलडोजर लेकर पहुँची थी, तब वकीलों और पुलिस के बीच तीखा टकराव हुआ था। वकीलों के हंगामे और कथित पथराव के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा था, जिसमें तीन वकील और एक पुलिस कांस्टेबल घायल हो गए थे।
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30 अगस्त की समय-सीमा: इसके बाद प्रशासन ने अंतिम नोटिस जारी कर 30 अगस्त तक वकीलों को स्वयं चैंबर खाली करने का समय दिया था, जिसके बाद कई अधिवक्ताओं ने अपनी सामग्रियां हटा ली थीं।
नगर निगम और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन कराया जा रहा है और सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा जमाकर बनाए गए सभी ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त किया जाएगा।