LPG डिस्ट्रीब्यूटरों की हड़ताल से दो महासंघों ने बनाई दूरी, बातचीत से समाधान पर जोर

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LPG डिस्ट्रीब्यूटरों के कमीशन में बढ़ोतरी और परिचालन संबंधी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर दिल्ली में 26 अक्टूबर को प्रस्तावित जंतर-मंतर धरने और अनिश्चितकालीन हड़ताल से दो प्रमुख राष्ट्रीय महासंघों ने खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है। ‘फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स ऑफ इंडिया’ (FLDI) और ‘ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स फेडरेशन’ (AILDF) ने स्पष्ट घोषणा की है कि वे किसी भी तरह के आंदोलन या हड़ताल का हिस्सा नहीं बनेंगे। दोनों संगठनों का मानना है कि पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ सार्थक बातचीत के माध्यम से ही मांगों का स्थाई समाधान निकाला जा सकता है। इसके साथ ही, महासंघों ने देश भर के उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया है कि घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पूरी तरह निर्बाध और सुचारू रूप से जारी रहेगी।

गौरतलब है कि ‘एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (LDAI) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 26 अक्टूबर को दिल्ली में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन और उसके बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल का आह्वान किया था। हालांकि, अन्य प्रमुख संगठनों के समर्थन न देने से इस आंदोलन का असर सीमित रहने की संभावना है। AILDF ने कहा कि देश को जब भी जरूरत पड़ी है, डिस्ट्रीब्यूटरों ने निष्ठापूर्वक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई है और आगे भी त्योहारों व सामान्य दिनों में घरेलू एलपीजी की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आने दी जाएगी।

घरेलू LPG सिलेंडर की बिक्री पर मिलने वाले डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन में पिछले 5 वर्षों से कोई संशोधन नहीं हुआ है। इस अवधि में परिवहन लागत, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटरों के व्यवसाय की आर्थिक व्यवहार्यता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस संकट को दूर करने के लिए FLDI और AILDF लगातार तेल कंपनियों और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं। हाल ही में 21 अक्टूबर को मुंबई स्थित इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मुख्यालय में तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के शीर्ष अधिकारियों और डिस्ट्रीब्यूटर प्रतिनिधियों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी।

इस बैठक के दौरान डिस्ट्रीब्यूटरों ने डिजिटल सुधारों, रिफिल बिक्री में गिरावट, नए गैस कनेक्शनों पर प्रतिबंध और अव्यवहारिक कमर्शियल इन्वेंट्री के कारण बढ़ रहे वित्तीय दबाव को प्रमुखता से उठाया। तेल कंपनियों के प्रबंधन ने प्रतिनिधियों को अवगत कराया कि डिस्ट्रीब्यूटरों के कमीशन में संशोधन का प्रस्ताव पहले ही पेट्रोलियम मंत्रालय को भेजा जा चुका है। अधिकारियों ने एक निश्चित समयावधि के भीतर अंतरिम राहत के रूप में संयुक्त सिफारिश भेजने पर भी सहमति जताई है। वर्तमान में यह प्रस्ताव मंत्रालय की अंतिम मंजूरी के लिए लंबित है, और महासंघों को उम्मीद है कि जल्द ही इस पर सकारात्मक निर्णय आएगा।

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