सर्दी की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर वायु प्रदूषण का संकट गंभीर रूप लेने लगा है। पूरे क्षेत्र में स्मॉग की घनी चादर छाने से हवा की गुणवत्ता (AQI) ‘बेहद खराब’ श्रेणी में पहुँच चुकी है। जहरीली हवा के कारण आम लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में भारी तकलीफ जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
अस्थमा के मरीजों के लिए बढ़ा जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों के अनुसार, बढ़ता वायु प्रदूषण विशेष रूप से अस्थमा के रोगियों के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरता है:
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सूक्ष्म प्रदूषकों का हमला: हवा में मौजूद PM 2.5 और PM10 जैसे खतरनाक कण सांस की नलियों में जाकर गंभीर सूजन पैदा कर सकते हैं।
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प्रमुख लक्षण: इसके चलते मरीजों में लगातार खांसी, सीने में जकड़न, सांस फूलना और सांस लेते समय घरघराहट की समस्या काफी बढ़ जाती है।
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हाई-रिस्क ग्रुप: छोटे बच्चों, बुजुर्गों और जिन मरीजों का अस्थमा नियंत्रित नहीं है, उन्हें इस दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सख्त जरूरत है।
दवाओं और इनहेलर को लेकर डॉक्टरों की सख्त हिदायत
चिकित्सकों का कहना है कि मरीज अक्सर लक्षणों में थोड़ा सुधार होते ही सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं:
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मर्जी से न बंद करें दवाएं: लक्षण कम होने पर खुद से इनहेलर बंद करना या दवाओं की खुराक घटाना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
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कंट्रोलर दवाओं का नियमित सेवन: मरीज अपनी निर्धारित कंट्रोलर दवाएं लगातार लेते रहें और डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज में कोई बदलाव न करें।
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रेस्क्यू इनहेलर रखें पास: आपातकालीन स्थिति के लिए ‘रेस्क्यू इनहेलर’ हमेशा अपने पास रखें और उसके सही तथा त्वरित इस्तेमाल की पूरी जानकारी रखें।
प्रदूषण से बचाव के कारगर उपाय
जहरीली हवा के प्रतिकूल प्रभावों से बचने के लिए विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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आउटडोर गतिविधियों पर रोक: हवा की गुणवत्ता खराब होने पर सुबह की सैर, दौड़ने और खुले में व्यायाम करने से बचें।
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मास्क का अनिवार्य उपयोग: अति-आवश्यक काम से बाहर निकलते समय सही फिटिंग वाला N95 मास्क ही पहनें।
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घर के अंदर की सुरक्षा: प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर घर की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें। संभव हो तो HEPA फिल्टर युक्त एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।
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अंदरूनी धुएं से परहेज: घर के भीतर धूम्रपान, अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और तेज खुशबू वाले रूम स्प्रे के इस्तेमाल से बचें, क्योंकि ये सांस की समस्या बढ़ा सकते हैं।
आपात स्थिति में तुरंत लें डॉक्टरी सलाह
यदि सही सावधानियों के बावजूद सांस फूलने की समस्या बढ़ती है, रेस्क्यू इनहेलर से भी कोई राहत महसूस नहीं होती या मरीज को बोलने में परेशानी होने लगती है, तो बिना समय गंवाए तुरंत किसी नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि बाहरी प्रदूषण को तुरंत नियंत्रित करना संभव नहीं है, लेकिन सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन, नियमित दवाओं और थोड़ी सावधानी से अस्थमा के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।