योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश बनेगा ‘ग्लोबल मैनपावर हब’, 9 जोनों में विकसित होगा कौशल प्रशिक्षण

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उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के युवाओं को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए एक बड़ी योजना को मंजूरी दी है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र (SVPSKPZ) विकास योजना को मंजूरी दी गई।

इसके तहत प्रदेश के सभी 75 जनपदों को जोड़ते हुए नौ जोनों में कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता का एकीकृत तंत्र विकसित किया जाएगा।

योजना का उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश तथा विदेश में कुशल मानव संसाधन का ‘अल्टीमेट सोर्सिंग हब’ और ‘ग्लोबल मैनपावर हब’ बनाना है। सरकार का उद्देश्य है कि युवाओं को उद्योगों की वास्तविक मांग के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए और उन्हें देश-विदेश के रोजगार अवसरों से जोड़ा जाए।

अब तक कौशल प्रशिक्षण, उद्योग विकास और रोजगार सेवाएं अलग-अलग विभागों के माध्यम से संचालित होती थीं। इस योजना से इन सभी सुविधाओं को एक ही परिसर में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर नियोजन तक आसानी होगी।

नौ जोनों में हब-स्पोक मॉडल

उत्तर प्रदेश को नौ जोनों में विभाजित कर हब एंड स्पोक मॉडल पर कौशल विकास एवं रोजगार तंत्र विकसित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय उद्योगों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं के आधार पर प्रशिक्षण की व्यवस्था तैयार की जाएगी।

जोन-1: गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़

जोन-2: सहारनपुर मंडल तथा बुलंदशहर, बागपत और मेरठ

जोन-3: मुरादाबाद और बरेली मंडल

जोन-4: आगरा और अलीगढ़ मंडल

जोन-5: लखनऊ और अयोध्या मंडल

जोन-6: कानपुर और प्रयागराज मंडल

जोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी मंडल

जोन-8: वाराणसी और आजमगढ़ मंडल

जोन-9: गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल

यह मॉडल स्थानीय उद्योगों की जरूरतों, रोजगार की मांग और क्षेत्रीय उद्योगों की आवश्यकताओं के आधार पर युवाओं को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित होगा।

पहले चरण में 5 केंद्र

योजना के प्रथम चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इनमें लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, गौतमबुद्ध नगर और झांसी शामिल हैं।

इन केंद्रों का विकास और संचालन पीपीपी आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (DBFOT) मॉडल या शासकीय संस्थाओं के माध्यम से किया जा सकेगा।

10 से 25 एकड़ में विकसित होंगे केंद्र

प्रत्येक कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र के लिए 10 से 25 एकड़ तक की उपयुक्त और भारमुक्त भूमि की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने के लिए निकटवर्ती राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो वर्ष के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

इन परिसरों में प्रशिक्षण केंद्र के साथ-साथ छात्रावास, सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल भी होंगे। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर एक ही जगह मिल सकेंगे।

कौशल और भाषा प्रशिक्षण पर जोर

योजना के तहत मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों के युवाओं को आधारभूत कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले युवाओं के लिए तकनीकी कौशल उन्नयन की व्यवस्था होगी।

देश और विदेश में उपलब्ध नौकरियों की मांग के अनुरूप भारतीय तथा विदेशी भाषाओं की प्रशिक्षण व्यवस्था भी रहेगी। सरकार मान्यता प्राप्त नियोजन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार से जोड़ने की योजना बना रही है।

1,725 करोड़ रुपये का प्रस्तावित व्यय

इस परियोजना पर आगामी तीन वर्षों में कुल 1,725 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं को आवश्यकता अनुसार वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) की सुविधा भी दी जा सकेगी।

पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर निगरानी व्यवस्था रखी गई है। इसके अंतर्गत परियोजना निर्माण, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

युवाओं को क्या लाभ मिलेगा?

उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण मिलेगा।

देश और विदेश में रोजगार के अवसरों तक पहुंच बढ़ेगी।

छात्रावास, प्लेसमेंट सेल और सेवायोजन सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी।

MSME क्षेत्र को कुशल कार्यबल उपलब्ध होगा।

भाषा प्रशिक्षण से विदेशी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और एआई आधारित तकनीक से प्रशिक्षण एवं नियोजन अधिक प्रभावी होगा।

यह योजना उत्तर प्रदेश के युवाओं को केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के बेहतर अवसर देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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