ओडिशा तट के पास गहरे समुद्र में मिली प्राकृतिक गैस, तीन दिन से लगातार हो रही फ्लो

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नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की तेल और गैस कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने ओडिशा तट के पास गहरे समुद्र में प्राकृतिक गैस की खोज की है। कंपनी ने सोमवार को बताया कि यह खोज महानदी अपतटीय बेसिन में की गई है। शुरुआती संकेतों के मुताबिक कुएं से गैस का फ्लो और प्रेशर उत्साहजनक है। हालांकि, इस खोज की व्यावसायिक व्यवहार्यता का आकलन अभी किया जाना बाकी है।

कंपनी के मुताबिक, अगर यह खोज व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होती है तो ओडिशा तट से इसकी अपेक्षाकृत कम दूरी के कारण इसका विकास और गैस का उत्पादन तेजी से शुरू किया जा सकता है।

कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर मिली गैस

ONGC ने बताया कि गहरे समुद्र में चलाए जा रहे उसके ‘समुद्र मंथन’ अभियान के तहत महानदी अपतटीय बेसिन में MN-DW18-1-H-D कुएं की खुदाई की गई। यह कुआं ओडिशा के कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर स्थित है।

कंपनी के अनुसार, इस कुएं की लक्षित गहराई 1,623 मीटर रखी गई थी। खुदाई के दौरान 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई के बीच गैस की मौजूदगी का पता चला।

यह महानदी बेसिन में ONGC के इस अभियान के तहत खोदा गया पहला कुआं है। कंपनी के मुताबिक, कुएं से पिछले तीन दिनों से गैस का फ्लो जारी है और इस दौरान दबाव भी उत्साहजनक बना हुआ है।

व्यावसायिक आकलन के बाद तय होगा आगे का विकास

ONGC ने स्पष्ट किया है कि गैस की यह खोज अभी आगे के मूल्यांकन और व्यावसायिक आकलन के अधीन है। यानी गैस मिलने के बाद अब यह जांचना जरूरी होगा कि यहां उपलब्ध संसाधन का व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन करना कितना व्यवहार्य है।

कंपनी ने कहा कि ओडिशा तट के अपेक्षाकृत करीब होने की वजह से यदि खोज व्यावसायिक रूप से सफल रहती है तो यहां से गैस उत्पादन शुरू करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।

साझा बुनियादी ढांचे से उत्पादन की संभावना

ONGC के मुताबिक, इस तरह के डीपवॉटर संसाधनों के विकास में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियम, 2025 के तहत उपलब्ध प्रावधान मददगार हो सकते हैं। साझा बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल कर क्षेत्र में मौजूद गहरे समुद्र के संसाधनों को उत्पादन से जोड़ने का विकल्प उपलब्ध हो सकता है।

इससे नई खोज के विकास के लिए अलग से बड़े बुनियादी ढांचे की जरूरत कम करने और संसाधन को उत्पादन में लाने की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

25 जुलाई को शुरू हुई थी कुएं की खुदाई

इस कुएं की ड्रिलिंग की शुरुआत 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने की थी। इसके बाद ONGC ने महानदी बेसिन में अपने डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन अभियान को आगे बढ़ाया।

कंपनी के अनुसार, यह खोज भारत के घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधन आधार को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण खोज है। महानदी बेसिन में पहले से हुई अन्य खोजों के साथ इसे भी साझा सुविधाओं के माध्यम से विकसित किए जाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि, गैस की मात्रा, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता से जुड़े अंतिम निष्कर्ष आगे होने वाले मूल्यांकन के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल ONGC कुएं से मिल रहे गैस फ्लो और प्रेशर की निगरानी करते हुए आगे के व्यावसायिक आकलन की प्रक्रिया में है।

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