आयुर्वेद में थायराइड का इलाज क्या है? जानें कैसे जड़ से नियंत्रित हो सकती है

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Written By: Sweta Sharma

आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी, अनियमित खान-पान और बढ़ते तनाव ने हार्मोन से जुड़ी बीमारियों को आम बना दिया है। इन्हीं में से एक है थायराइड की समस्या, जो आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों के अनुसार थायराइड केवल एक बीमारी नहीं बल्कि शरीर के हार्मोनल संतुलन से जुड़ी स्थिति है, जिसे सही जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपचार के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है।

शरीर में मौजूद थायराइड ग्रंथि ऊर्जा स्तर, मेटाबोलिज्म, वजन, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तब शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं। आधुनिक चिकित्सा में इसे लंबे समय तक दवाओं से नियंत्रित किया जाता है, जबकि आयुर्वेद शरीर के मूल कारणों को संतुलित करने पर जोर देता है।

आयुर्वेद में थायराइड को कैसे समझा जाता है?

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ बताती हैं कि थायराइड त्रिदोष — वात, पित्त और कफ — के असंतुलन का परिणाम है। आयुर्वेद इसे केवल रोग नहीं मानता, बल्कि शरीर की आंतरिक प्रणाली में असंतुलन के संकेत के रूप में देखता है।

हाइपोथायराइड

यह स्थिति कफ दोष बढ़ने से जुड़ी मानी जाती है। इसके लक्षणों में वजन बढ़ना, ठंड अधिक लगना, थकान और मानसिक तनाव शामिल हैं।

ब्रह्मपुत्र के नीचे रोड-रेल टनल को हरी झंडी

हाइपरथायराइड

यह पित्त दोष की अधिकता से संबंधित माना जाता है। इसमें बेचैनी, नींद की कमी, ज्यादा पसीना और तेजी से वजन घटना देखा जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार पाचन अग्नि कमजोर होने और शरीर में ‘आम’ यानी टॉक्सिन्स जमा होने से हार्मोनल असंतुलन पैदा होता है।

थायराइड के प्रमुख आयुर्वेदिक कारण

  • कमजोर पाचन शक्ति

  • अनियमित खान-पान

  • अत्यधिक तनाव और चिंता

  • पर्याप्त नींद की कमी

  • शारीरिक गतिविधि की कमी

  • लंबे समय तक दवाओं का सेवन

आयुर्वेद में थायराइड उपचार के तीन आधार

1. अग्नि सुधार (Digestive Fire Balance)
जब पाचन मजबूत होता है, तब हार्मोन स्वतः संतुलित होने लगते हैं।

2. दोष संतुलन
वात, पित्त और कफ को संतुलित करके थायराइड ग्रंथि की कार्यक्षमता बेहतर की जाती है।

3. आम (टॉक्सिन्स) का नाश
शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालना उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

थायराइड में सही आहार

  • गुनगुना पानी पीना

  • हरी सब्जियां और दालें

  • सीमित मात्रा में शुद्ध घी

  • हल्दी, अदरक और काली मिर्च का सेवन

योग और प्राणायाम की भूमिका

आयुर्वेद और योग का संयोजन थायराइड नियंत्रण में प्रभावी माना जाता है।

  • सर्वांगासन

  • मत्स्यासन

  • भुजंगासन

  • अनुलोम-विलोम

  • भ्रामरी प्राणायाम

लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव

  • रोज 7–8 घंटे की नींद

  • नियमित दिनचर्या अपनाना

  • ध्यान और प्राणायाम से तनाव कम करना

  • स्क्रीन टाइम कम करना

  • सुबह जल्दी उठने की आदत

क्या आयुर्वेद से थायराइड ठीक हो सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार आयुर्वेद केवल लक्षणों को दबाने के बजाय समस्या की जड़ पर काम करता है। प्राकृतिक उपचार, संतुलित आहार और सही जीवनशैली अपनाकर थायराइड को लंबे समय तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि किसी भी उपचार को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

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