डर के साए में वेनेजुएला: बमबारी के बाद घरों में कैद लोग

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अमेरिकी सेना की कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में जनजीवन पूरी तरह ठहर सा गया है। राजधानी काराकास सहित कई शहरों में हालात इतने खराब हैं कि लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और हवाई हमलों के बाद देश में भय और अफरातफरी का माहौल बन गया है।

काराकास में रहने वाले भारतीय नागरिक सुनील मल्होत्रा ने बताया कि हमलों के बाद शहर का बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब गया है। बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और मोबाइल नेटवर्क भी बेहद कमजोर है। कई इलाकों में इंटरनेट और कॉलिंग सेवाएं पूरी तरह बंद हैं। मल्होत्रा के मुताबिक, हालात ऐसे हैं कि सड़कों पर इक्का-दुक्का लोग ही नजर आते हैं। दुकानें बंद हैं और बसें-टैक्सी सड़कों से गायब हैं। लोग अपने घरों में बंद रहने को ही सबसे सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।

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जो थोड़ी बहुत दुकानें खुली हैं, वहां खाने-पीने के सामान के लिए सैकड़ों लोग लाइन में लगे हैं। खासतौर पर ब्रेड, दूध और पानी के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं। दवा दुकानों पर भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। बिजली न होने की वजह से मोबाइल चार्ज करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। लोग उन जगहों की तलाश में भटक रहे हैं, जहां जनरेटर की सुविधा हो। वहां भी घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोगों को परिवार और रिश्तेदारों से संपर्क करने में भारी परेशानी हो रही है।

लोगों को डर सता रहा है कि हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्हें 2014 और 2017 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों की याद आ रही है, जब बड़ी संख्या में नागरिक मारे गए थे और कई लोग आज तक लापता हैं।

भारतीय समुदाय के लोगों के लिए भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में है। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए उन्हें सुरक्षा से जुड़ी जानकारी और जरूरी निर्देश दिए जा रहे हैं। दूतावास ने फिलहाल लोगों को घरों में रहने और अफवाहों से बचने की सलाह दी है। वेनेजुएला सरकार ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि यह हमला देश के तेल संसाधनों पर नजर का नतीजा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

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