नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त फंड्स को मैनेज करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत तीन अलग-अलग चरणों में कुल 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेचने का ऐलान किया है। इस प्रक्रिया की पहली नीलामी 17 सितंबर को होगी।
आरबीआई के मुताबिक, पहले चरण में 17 सितंबर को 50,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियां बेची जाएंगी। इसके बाद 21 सितंबर और 28 सितंबर को 25,000-25,000 करोड़ रुपये की प्रतिभूतियों की बिक्री की जाएगी। केंद्रीय बैंक का कहना है कि बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध फंड्स की मौजूदा स्थिति और उसमें हो रहे बदलाव की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया गया है।
2029 से 2032 के बीच मैच्योर होंगी प्रतिभूतियां
17 सितंबर को होने वाली पहली नीलामी में 2029, 2030, 2031 और 2032 में मैच्योर होने वाली सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होंगी। आरबीआई ने इसके लिए छह सिक्योरिटीज की सूची जारी की है।
इनमें 7.59% GS 2029, 6.79% GS 2029, 7.61% GS 2030, 5.77% GS 2030, 6.68% GS 2031 और 8.28% GS 2032 शामिल हैं। इन प्रतिभूतियों की मैच्योरिटी मार्च 2029 से फरवरी 2032 के बीच होगी।
E-Kuber के जरिए जमा करनी होगी बोली
आरबीआई के अनुसार, 17 सितंबर को होने वाली नीलामी में भाग लेने वाले प्रतिभागी सुबह 9:30 बजे से 10:30 बजे के बीच RBI के E-Kuber सिस्टम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपनी बोलियां जमा कर सकेंगे। नीलामी के परिणाम उसी दिन घोषित किए जाएंगे।
सफल बोलीदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित सरकारी प्रतिभूतियां 18 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक उनके सब्सिडियरी जनरल लेजर (SGL) खाते में उपलब्ध हों।
बैंकों में बढ़ी नकदी के बीच RBI का कदम
रिजर्व बैंक का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बैंकों में उपलब्ध फंड्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। विदेशी मुद्रा प्रवासी बैंक (FCNR-B) जमा के जरिए सिस्टम में अतिरिक्त विदेशी मुद्रा आने से बैंकिंग सिस्टम में नकदी की स्थिति मजबूत हुई है।
अतिरिक्त फंड्स को मैनेज करने के लिए RBI पहले से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी जैसे उपाय कर रहा है। अब OMO के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री से बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
RBI के इस कदम पर बाजार की नजर रहेगी, क्योंकि सरकारी प्रतिभूतियों की इतनी बड़ी बिक्री से बैंकिंग सिस्टम की तरलता और सरकारी बॉन्ड बाजार पर असर पड़ सकता है।