डीजल खरीद पर सीमा
देश में कुछ निजी पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री सीमित की जा रही है। Jio-bp ने चुनिंदा आउटलेट्स पर प्रति ग्राहक या प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम 50 लीटर डीजल देने की सीमा लागू की है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने कुछ पंपों की कुल दैनिक डीजल बिक्री पर करीब 6,000 लीटर की सीमा भी रखी है।
Nayara Energy के कुछ पेट्रोल पंपों पर भी डीजल खरीद सीमा लगाई गई है। यहां स्थान और आउटलेट के अनुसार एक ट्रांजैक्शन में 70 से 200 लीटर तक डीजल खरीदने की अनुमति बताई गई है।
यह राष्ट्रीय स्तर पर डीजल की कमी या सभी पंपों पर लागू कोई नियम नहीं है। ये प्रतिबंध अभी चुनिंदा निजी आउटलेट्स तक सीमित बताए गए हैं।
सीमा लगाने की वजह
डीजल की रिटेल कीमत और औद्योगिक/बल्क ग्राहकों की कीमत में बड़ा अंतर पैदा हुआ है। सरकारी समर्थन वाली रिटेल दरों पर मिलने वाला डीजल औद्योगिक और थोक उपयोगकर्ताओं के लिए मिलने वाले डीजल से लगभग ₹40 प्रति लीटर तक सस्ता बताया गया है।
बल्क ग्राहक आमतौर पर इन क्षेत्रों से आते हैं:
फैक्ट्रियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स।
टेलीकॉम टावर और डेटा सेंटर।
होटल, मॉल और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान।
अस्पताल और अन्य संस्थान।
डीजल जनरेटर पर निर्भर इकाइयां।
परिवहन और निर्माण गतिविधियों से जुड़े ऑपरेटर।
कीमत में अंतर बढ़ने पर इनमें से कुछ खरीदार bulk supply चैनल से खरीदने के बजाय रिटेल पेट्रोल पंपों से डीजल लेने लगे। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ ग्राहक एक बार में 400 से 600 लीटर तक डीजल खरीद रहे थे। इससे सामान्य वाहन ग्राहकों के लिए बने रिटेल आउटलेट्स पर स्टॉक और रीफिलिंग क्षमता पर दबाव पड़ा।
रिटेल और बल्क डीजल में अंतर
सरकार के अनुसार, रिटेल ईंधन पर उपलब्ध समर्थन औद्योगिक और बल्क आपूर्ति के लिए नहीं है। ऐसे ग्राहकों के लिए कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अधिक करीब रहती हैं।
सरकारी कंपनियों पर क्या स्थिति?
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) ने पहले कहा था कि उनके रिटेल आउटलेट्स पर कोई ऐसी पाबंदी नहीं लगाई गई है। ये तीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां देश के एक लाख से अधिक पेट्रोल पंपों में लगभग 90 प्रतिशत नेटवर्क संचालित करती हैं।
हालांकि, नई रिपोर्टों में कहा गया है कि स्टॉक पर दबाव बढ़ने की स्थिति में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां भी निजी कंपनियों जैसे कदम पर विचार कर सकती हैं। अभी तक उनके द्वारा सभी आउटलेट्स के लिए कोई औपचारिक बिक्री-सीमा आदेश घोषित नहीं किया गया है।
इसलिए ग्राहकों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि IOC, BPCL या HPCL के हर पंप पर डीजल खरीद की सीमा लागू हो चुकी है।
सरकार के नियम क्या कहते हैं?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 2026 में “Motor Spirit and High-Speed Diesel (Temporary Regulation of Supply through Retail Outlets) Order” अधिसूचित किया था। इसका उद्देश्य जमाखोरी, कालाबाजारी और रिटेल पंपों से असामान्य रूप से बड़ी खरीद को रोकना है।
इस आदेश के तहत सरकार ने रिटेल आउटलेट पर डीजल की बिक्री को नियंत्रित करने की शक्ति रखी है। जून में जारी आदेश के अनुसार, एक ग्राहक या वाहन को प्रतिदिन 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं बेचा जाना था और खरीदार के लिए इसे दोबारा बेचने पर रोक थी। यह व्यवस्था शुरू में अधिकतम 90 दिनों के लिए लागू की गई थी, जब तक इसे पहले वापस न लिया जाए।
लेकिन Jio-bp और Nayara की वर्तमान सीमा कंपनी या आउटलेट-स्तर की आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी बताई जा रही है। इसे हर जगह लागू सरकारी सीमा समझना सही नहीं होगा।
आम ग्राहकों पर असर
कार, बाइक, बस, ट्रक और अन्य सामान्य वाहन उपभोक्ताओं को फिलहाल व्यापक असर पड़ने की सूचना नहीं है। निजी पंपों पर लगाई गई सीमा मुख्य रूप से बड़ी मात्रा में डीजल लेने वाले ग्राहकों को प्रभावित कर सकती है।
फिर भी, बड़े टैंकर, ड्रम या जरीकैन में डीजल खरीदने वाले ग्राहक संबंधित पंप से पहले पूछताछ कर लें। स्थानीय स्तर पर लागू नियम अलग हो सकते हैं।
स्टॉक पर दबाव क्यों बढ़ा?
हर पेट्रोल पंप की भूमिगत टंकियों में ईंधन जमा करने की क्षमता सीमित होती है। पंप का स्टॉक खत्म होने पर उसे डिपो या सप्लाई नेटवर्क से फिर भरना पड़ता है।
जब कुछ बड़े ग्राहक रोजाना सैकड़ों लीटर डीजल लेने लगते हैं, तो सामान्य मांग और असाधारण bulk demand के बीच संतुलन बिगड़ सकता है। निजी कंपनियों ने इसी दबाव को संभालने और सामान्य वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए ईंधन उपलब्ध रखने के उद्देश्य से सीमाएं लागू की हैं।
ऊंचे कच्चे तेल दाम, पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाएं और रूसी ईंधन निर्यात में कमी जैसी परिस्थितियों को भी डीजल आपूर्ति तथा मार्जिन पर दबाव के कारणों में बताया गया है।