Hockey World Cup 2026 : बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 15 अगस्त से हो गया है। इस बार टूर्नामेंट कई मायनों में ऐतिहासिक है। पहली बार पुरुष और महिला हॉकी वर्ल्ड कप एक ही समय पर आयोजित किए जा रहे हैं और दोनों प्रतियोगिताओं में 16-16 टीमें हिस्सा ले रही हैं। टूर्नामेंट 15 से 30 अगस्त तक चलेगा।
भारतीय पुरुष हॉकी टीम भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने अभियान की शुरुआत कर रही है। भारत का पहला मुकाबला पूल-डी में वेल्स के खिलाफ एम्स्टेलवीन के वेगेनर स्टेडियम में है। पूल-डी में भारत के अलावा पाकिस्तान, इंग्लैंड और वेल्स शामिल हैं।
क्या है हॉकी वर्ल्ड कप का नया फॉर्मेट?
2026 वर्ल्ड कप में 16 टीमों को चार पूल में बांटा गया है। पुरुष वर्ग में पूल-ए में नीदरलैंड, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड और जापान हैं। पूल-बी में बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस और मलेशिया हैं। पूल-सी में ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, आयरलैंड और दक्षिण अफ्रीका हैं, जबकि पूल-डी में भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड और वेल्स को जगह मिली है।
इस बार टूर्नामेंट का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि पारंपरिक क्वार्टर फाइनल चरण नहीं होगा। शुरुआती पूल में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें अगले चरण में पहुंचेंगी। पूल-ए और पूल-डी की शीर्ष टीमें एक क्रॉसओवर पूल में जाएंगी, जबकि पूल-बी और पूल-सी की शीर्ष टीमें दूसरे क्रॉसओवर पूल में शामिल होंगी।
ग्रुप स्टेज के नतीजे भी होंगे बेहद अहम
नए फॉर्मेट में शुरुआती चरण के मुकाबलों की अहमियत काफी बढ़ गई है। कुछ टीमों के बीच पहले चरण में हासिल किए गए परिणाम और अंक अगले चरण में भी प्रभाव डालेंगे। यानी टीमों के लिए केवल अगले दौर में पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि शुरुआती मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करना भी जरूरी होगा।
क्रॉसओवर पूल में पहुंचने वाली टीमों को आगे दो मुकाबले खेलने होंगे। यदि किसी टीम ने शुरुआती पूल में अपने साथ आगे जाने वाली टीम के खिलाफ मुकाबला खेला है, तो उस मैच का परिणाम अगले चरण की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। इससे हर मैच में अंक हासिल करने की रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
सेमीफाइनल में सीधे पहुंचने का मौका
दूसरे चरण के दोनों पूल में शीर्ष दो स्थान हासिल करने वाली टीमें सीधे सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी। इसके बाद सेमीफाइनल के विजेता फाइनल में खिताब के लिए भिड़ेंगे। इस बदलाव के कारण टीमों को शुरुआत से ही लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा।
भारतीय टीम के लिए यह टूर्नामेंट खास महत्व रखता है। टीम 1975 के बाद पहली बार पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप का खिताब जीतने के इंतजार को खत्म करना चाहेगी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम का पहला लक्ष्य पूल-डी में मजबूत शुरुआत करना होगा।
इस नए फॉर्मेट में भारत के लिए 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ मुकाबला सिर्फ टूर्नामेंट का पहला मैच नहीं, बल्कि आगे की राह तय करने वाली महत्वपूर्ण शुरुआत भी साबित हो सकता है।