वायरल भजन से मिली पहचान
फिल्म ‘हनुमान अंश’ के भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ से बुंदेली लोक गायक सुनील लोधी को देशभर में पहचान मिली है। जन्म से दृष्टिबाधित सुनील ने अपनी ग्रामीण शैली और भावपूर्ण आवाज से दर्शकों का ध्यान खींचा।
फिल्म की सफलता के बाद सुनील की गायकी के साथ-साथ उनकी निजी जिंदगी और संघर्ष की कहानी भी चर्चा में आ गई है। कभी ट्रेनों में गाकर अपना गुजारा करने वाले सुनील अब बड़े मंचों और मीडिया रिपोर्टों का हिस्सा बन रहे हैं।
अनुप्रिया नागर कराएंगी इलाज
‘हनुमान अंश’ की 21 वर्षीय प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने सुनील लोधी की आंखों के इलाज में मदद करने का फैसला किया है। उन्होंने मुंबई के एक नेत्र रोग विशेषज्ञ से सुनील के लिए अपॉइंटमेंट भी लिया है।
सुनील के मुंबई पहुंचने के बाद डॉक्टर उनकी आंखों की विस्तृत जांच करेंगे। जांच के आधार पर यह तय होगा कि उनकी दृष्टि में सुधार की कितनी संभावना है और कौन-से उपचार विकल्प उनके लिए उपयुक्त होंगे।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इलाज के बाद सुनील की रोशनी कितनी लौट सकती है। डॉक्टरों की जांच और चिकित्सकीय आकलन के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी दिया भरोसा
अनुप्रिया नागर से पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी सुनील लोधी की मदद का आश्वासन दे चुके हैं।
सुनील मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले हैं। हाल ही में वह अपने माता-पिता के साथ मुख्यमंत्री से मिले थे और उन्हें अपना भजन सुनाया था। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञ डॉक्टरों से उनकी आंखों की जांच और इलाज कराने का भरोसा दिया था।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने सुनील को ₹1 लाख की सम्मान निधि देने की घोषणा भी की थी।
इलाज की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी?
चूंकि सुनील जन्म से दृष्टिबाधित हैं, इसलिए उपचार की सफलता उनके नेत्रों की वास्तविक स्थिति और समस्या के कारण पर निर्भर करेगी। केवल विशेषज्ञ जांच के बाद ही कोई निश्चित निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
सुनील की संघर्ष की कहानी
सुनील लोधी ने दृष्टिबाधिता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह बुंदेली लोक संगीत से जुड़े रहे और लोगों के बीच गाकर अपनी पहचान बनाते रहे।
उनकी आवाज में स्थानीय लोक शैली और भक्ति संगीत का अनूठा मेल है। ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ के वायरल होने के बाद उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रशंसा मिलने लगी।
उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित साधनों और शारीरिक चुनौतियों के बावजूद प्रतिभा को अवसर मिलने पर व्यापक पहचान हासिल की जा सकती है।
‘हनुमान अंश’ की सफलता
‘हनुमान अंश’ को कम बजट में बनी सफल फिल्मों में गिना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब ₹2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹400 करोड़ से अधिक का कारोबार किया है।
फिल्म की लोकप्रियता में इसके भजनों और आध्यात्मिक विषय की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। सुनील लोधी की आवाज में गाया गया भजन सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ और उनके लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खुले।
विदेशों में भी लोकप्रिय हुआ भजन
सुनील लोधी का भजन भारत के बाहर भी लोगों को पसंद आ रहा है। अमेरिकी जियोलॉजिस्ट, वैदिक मेडिटेशन शिक्षक और कीर्तन लीडर एलिक सोडरबर्ग ने इस भजन का अपना संस्करण सोशल मीडिया पर साझा किया।
वीडियो में उन्होंने एकतारा बजाते हुए ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ गाया। इससे गीत और सुनील की आवाज की लोकप्रियता अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक भी पहुंची।
अभी इलाज की गारंटी नहीं
सुनील के इलाज को लेकर उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अभी यह दावा नहीं किया जा सकता कि उनकी दृष्टि पूरी तरह लौट आएगी।
चिकित्सकीय रूप से परिणाम इन बातों पर निर्भर करेंगे:
दृष्टिबाधिता का वास्तविक कारण।
आंखों की संरचनात्मक स्थिति।
ऑप्टिक नर्व और रेटिना की अवस्था।
जन्मजात समस्या की प्रकृति।
उपलब्ध उपचार या सर्जरी की उपयुक्तता।
डॉक्टरों का चिकित्सकीय आकलन।
इसलिए फिलहाल सही जानकारी यही है कि सुनील की विशेषज्ञ जांच और संभावित उपचार की तैयारी की जा रही है।