भारतीय मनोरंजन जगत में जब भी रामायण पर किसी नई फिल्म या सीरीज की घोषणा होती है, दर्शकों की तुलना सबसे पहले रामानंद सागर के लोकप्रिय धारावाहिक और भारत-जापान के सहयोग से बनी एनिमेटेड फिल्म ‘रामायण: द लेजेंड ऑफ प्रिंस राम’ से होने लगती है। हाल के वर्षों में ओम राउत की फिल्म ‘आदिपुरुष’ को भी रामायण के चित्रण को लेकर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि इससे पहले भी रामायण पर बनी एक अमेरिकी एनिमेटेड फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था।
साल 2008 में अमेरिकी कलाकार और फिल्ममेकर नीना पाले ने ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ (Sita Sings the Blues) नाम से एक एनिमेटेड म्यूजिकल फिल्म बनाई थी। यह फिल्म रामायण की पारंपरिक कथा को आधुनिक और फेमिनिस्ट नजरिए से पेश करती है। नीना पाले ने भारत में बिताए अपने अनुभवों और अपनी निजी जिंदगी की घटनाओं से प्रेरित होकर इस फिल्म का निर्माण किया था। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी “ब्रेक-अप स्टोरी” के रूप में प्रस्तुत किया।
फिल्म की सबसे खास बात यह थी कि इसमें माता सीता और भगवान राम की कहानी के साथ-साथ निर्देशक की अपनी निजी प्रेम कहानी और रिश्तों के टूटने के अनुभव को समानांतर रूप से दिखाया गया। फिल्म में वेक्टर ग्राफिक्स, पारंपरिक भारतीय शैडो पपेट्स और राजपूत व पहाड़ी मिनिएचर पेंटिंग से प्रेरित 2D एनीमेशन का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा 1920 के दशक की मशहूर जैज गायिका एनेट हंसशॉ के गीतों को भी बैकग्राउंड म्यूजिक के रूप में शामिल किया गया।
साल 2009 में इस फिल्म को निर्माता ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मुफ्त डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराया। उस समय इंटरनेट पर किसी स्वतंत्र फिल्म का इस तरह वायरल होना असाधारण माना जाता था। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली और कई समीक्षकों ने इसकी रचनात्मक शैली की तारीफ की। प्रसिद्ध रिव्यू प्लेटफॉर्म Rotten Tomatoes पर इसे 100 प्रतिशत रेटिंग भी मिली।
हालांकि जहां एक ओर फिल्म को कलात्मक प्रयोग के लिए सराहा गया, वहीं दूसरी ओर भारत में इसे लेकर तीखा विरोध भी हुआ। कई हिंदू संगठनों, जिनमें हिंदू जनजागृति समिति भी शामिल थी, ने आरोप लगाया कि फिल्म में भगवान राम और माता सीता के चरित्र को धार्मिक भावनाओं के विपरीत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। संगठनों ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन और कानूनी कार्रवाई की भी कोशिश की।
आज जब नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ चर्चा में है, तब ‘सीता सिंग्स द ब्लूज’ का यह विवाद एक बार फिर याद दिलाता है कि भारतीय धार्मिक ग्रंथों पर आधारित किसी भी रचनात्मक प्रस्तुति में सांस्कृतिक संवेदनशीलता और आस्था का सम्मान बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण माना जाता है।