20 मार्च 2003 को दिल्ली के लोढ़ी रोड स्थित रॉ कार्यालय में हुए दर्दनाक हादसे में रॉ के निदेशक विपिन हांडा की मौत का मामला लंबे कानूनी संघर्ष के बाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने था।
शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें हांडा के परिवार को ओटिस एलीवेटर कंपनी (इंडिया) लिमिटेड समेत संबंधित पक्षों के खिलाफ 3.01 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।
क्या हुआ था हादसे के दिन?
20 मार्च 2003 को एक मीटिंग के बाद हांडा और 12 अन्य अधिकारी लिफ्ट में सवार हुए।
लिफ्ट सातवीं और छठी मंजिल के बीच फंस गई। वहां मौजूद लोगों में से पहले एक व्यक्ति को निकाला गया, जबकि बाकी लोग छठी मंजिल पर खुलने पर बाहर निकले। हांडा को बाहर निकालने का प्रयास असफल रहा और उन्हें निकाला नहीं जा सका।
एक तकनीकी समिति ने रिपोर्ट में कहा कि वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की वजह से लिफ्ट रुक गई थी। जब उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की जा रही थी, तो किसी व्यक्ति ने मशीन रूम जाकर “ब्रेक रिलीज की” (कुंजी) से ब्रेक खोल दिए, जिससे लिफ्ट नीचे गिर गई। आयोग ने इस कार्रवाई को हादसे का निर्णायक कारण माना और इसे मानव त्रुटि बताया।
NCDRC का फैसला और जिम्मेदारी का वितरण
NCDRC ने ओटिस को 70% जिम्मेदार ठहराया, मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) को 25% और रॉ को 5% दोषी माना।
आयोग ने पाया कि ओटिस जैसी कंपनी जो लिफ्ट की संपूर्ण देखभाल और मेंटेनेंस का कार्य करती है, उसे उपयोगकर्ता के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ओटिस को उस खराबी की जानकारी थी और उसने समाधान सुझाया भी था, पर यह सुनिश्चित नहीं किया कि सुझाया गया समाधान लागू हुआ या नहीं। ऐसा न करना “सेवा में कमी” माना गया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने ओटिस की अपील खारिज कर दी और NCDRC के मुआवजे के आदेश को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा हर लिफ्ट की मूल आवश्यकता है और उसे सुनिश्चित करना लिफ्ट कंपनी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। साथ ही फैसले में जिम्मेदारी के वितरण को उचित बताया गया क्योंकि यह प्रत्येक पक्ष के नियंत्रण, जानकारी और जिम्मेदारी के स्तर के अनुरूप था।
इस फैसले का महत्व
यह निर्णय उपभोक्ता सुरक्षा और दायित्व नियमों के लिहाज से अहम मिसाल है। लिफ्ट कंपनियों और मेंटेनेंस एजेंसियों के प्रति कड़े मानदंड और उच्च सतर्कता की जरूरत को अदालत ने रेखांकित किया है।