Supreme Court of India ने एक भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई के दौरान उस दावे पर हैरानी जताई, जिसमें कहा गया कि रिश्वत के रूप में बरामद की गई नकदी को चूहों ने नष्ट कर दिया। अदालत ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों में जब्त रकम इसी तरह नष्ट होती रही, तो इससे राज्य को भारी राजस्व नुकसान हो सकता है।
मामले की सुनवाई जस्टिस J. B. Pardiwala और जस्टिस K. V. Viswanathan की बेंच ने की। अदालत ने कहा, “हमें यह जानकर हैरानी हुई कि मुद्रा नोट को चूहों ने नष्ट कर दिया। हम सोच रहे हैं कि ऐसे मामलों में बरामद कितने पैसे इसी तरह नष्ट हो जाते होंगे। यह किसी भी राज्य के लिए राजस्व का बड़ा नुकसान है।”
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि नोट नष्ट होने को लेकर दिया गया स्पष्टीकरण पूरी तरह भरोसा नहीं दिलाता। अदालत ने संकेत दिया कि इस पहलू की अंतिम सुनवाई के दौरान विस्तार से जांच की जाएगी।
यह मामला एक महिला अधिकारी से जुड़ा है, जो बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी के पद पर कार्यरत थीं। उन पर 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप था। निचली अदालत ने पहले उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन बाद में मामला Patna High Court पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए महिला को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत महिला को कारावास की सजा दी थी। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उस सजा पर रोक लगाते हुए महिला को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। जमानत की शर्तें ट्रायल कोर्ट द्वारा तय की जाएंगी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस अवलोकन पर भी ध्यान दिया, जिसमें कहा गया था कि जब्त रिश्वत राशि वाला लिफाफा चूहों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। हालांकि, मालखाना रजिस्टर में उस राशि की एंट्री मौजूद थी।
पटना हाईकोर्ट ने माना था कि केवल रकम का नष्ट हो जाना मामले को कमजोर नहीं करता, यदि अन्य सबूत दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हों। अब इस पूरे मामले पर अंतिम सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट विस्तृत विचार करेगा।