ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैली अफवाहों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

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नई दिल्ली: देश की सुरक्षा से जुड़े अभियानों के दौरान अफवाहों का फैलना एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी यही स्थिति देखने को मिली, जब डिजिटल मीडिया पर बड़ी संख्या में भ्रामक खबरें वायरल हुईं। इस पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की।

सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल मुरुगन ने लोकसभा में बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान 1,400 से ज्यादा यूआरएल को ब्लॉक किया गया। ये सभी लिंक ऐसे कंटेंट से जुड़े थे, जो गलत जानकारी फैला रहे थे या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। सरकार के अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली फेक न्यूज़ को रोकने के लिए कई स्तरों पर काम किया गया। PIB की फैक्ट चेक यूनिट ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और हजारों भ्रामक खबरों का खंडन किया। इससे आम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिली।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया संस्थानों के लिए तय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। पिछले पांच वर्षों में नियमों के उल्लंघन पर कई टीवी चैनलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ एक संवेदनशील सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य देश की सीमाओं के पार सक्रिय आतंकी नेटवर्क को कमजोर करना था। ऐसे समय में गलत जानकारी का प्रसार न केवल ऑपरेशन की गोपनीयता को प्रभावित करता है, बल्कि जनता में भ्रम और असुरक्षा भी पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती निर्भरता के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। हर नागरिक को यह समझना होगा कि बिना पुष्टि के किसी भी जानकारी को साझा करना खतरनाक हो सकता है।

सरकार की यह कार्रवाई न केवल फेक न्यूज़ पर नियंत्रण की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह डिजिटल अनुशासन को मजबूत करने का प्रयास भी है। आने वाले समय में इस तरह की निगरानी और सख्ती और बढ़ने की संभावना है।

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