लखनऊ: वर्ष 2026 की ग्रीष्म ऋतु को लेकर मौसम विभाग ने दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें प्रदेश के मौसम को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल अप्रैल से जून के बीच मौसम सामान्य से अलग रुख दिखा सकता है, जिसमें बारिश और गर्मी दोनों का असर देखने को मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में प्रशांत महासागर में तटस्थ निनो (Neutral El Niño) परिस्थितियां बनी हुई हैं, जो आने वाले महीनों में भी जारी रह सकती हैं। इसके साथ ही हिन्द महासागर द्विध्रुव (IOD) की तटस्थ स्थिति भी मौसम को प्रभावित करेगी। इन दोनों कारकों के संयुक्त प्रभाव से उत्तर प्रदेश में मौसम में असामान्य बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
अप्रैल महीने के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना जताई गई है। हालांकि, पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। इससे वहां उमस और गर्मी का प्रभाव ज्यादा महसूस किया जाएगा।
वहीं, पूरे ग्रीष्म ऋतु की बात करें तो दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी हिस्सों में औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में लू के दिनों की संख्या बढ़ सकती है, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्रों में।
रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है, जिससे रातों में भी गर्मी का असर बना रहेगा। यह स्थिति खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
मार्च महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले पखवाड़े में तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री अधिक रहा, जबकि दूसरे पखवाड़े में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश ने कुल वर्षा को सामान्य बनाए रखा।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते जलवायु पैटर्न के कारण इस तरह के उतार-चढ़ाव अब सामान्य हो गए हैं। ऐसे में लोगों को मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।