नई दिल्ली। देश की राजनीति के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत निर्वाचन आयोग शाम चार बजे एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहा है। दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहेंगे। माना जा रहा है कि आयोग इस दौरान चुनाव से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण तारीखों की जानकारी साझा करेगा, जिसमें नामांकन, मतदान और मतगणना की तिथियां शामिल होंगी।
पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग की टीम इन राज्यों में चुनावी तैयारियों का आकलन कर रही थी। आयोग के अधिकारियों ने अलग-अलग राज्यों में जाकर प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हो सके।
फरवरी महीने में आयोग की टीम ने असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में तैयारियों की समीक्षा की थी। इसके बाद मार्च के पहले सप्ताह में केरल का दौरा किया गया। वहीं 9 और 10 मार्च को पश्चिम बंगाल में भी चुनावी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया। इन दौरों के दौरान कानून-व्यवस्था, मतदाता सूची की स्थिति और सुरक्षा बलों की तैनाती जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इन राज्यों की विधानसभा का कार्यकाल भी जल्द समाप्त होने वाला है। पश्चिम बंगाल की विधानसभा का कार्यकाल 7 मई 2026 को खत्म होगा। इसके बाद तमिलनाडु का कार्यकाल 10 मई तक है। असम में 20 मई और केरल में 23 मई को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होगा। वहीं पुडुचेरी की विधानसभा 15 जून 2026 तक कार्यरत रहेगी।
पिछले चुनावों के नतीजों पर नजर डालें तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी और ममता बनर्जी दोबारा मुख्यमंत्री बनी थीं। असम में भारतीय जनता पार्टी ने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाई थी। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व में सरकार बनी, जबकि केरल में एलडीएफ ने लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की थी।
पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन को बहुमत मिला था और एन. रंगास्वामी मुख्यमंत्री बने थे। इस बार चुनाव आयोग मतदान के चरणों की संख्या कम रखने पर भी विचार कर सकता है ताकि चुनाव प्रक्रिया अधिक सुचारू और सुरक्षित ढंग से पूरी की जा सके।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चुनाव आचार संहिता लागू होने की भी संभावना है। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दल अपने चुनावी अभियान को आधिकारिक रूप से तेज कर देंगे।