यूजीसी के नए विनियमों को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच लखनऊ में भी विरोध प्रदर्शन हुआ। सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित नियमों से समानता का सिद्धांत प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन परिवर्तन चौक से शुरू हुआ और भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच आगे बढ़ा।
प्रशासन पहले से सतर्क था। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने की अपील की।
मामला न्यायिक जांच के दायरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने नियमों के कुछ प्रावधानों पर अंतरिम रोक लगाई है और केंद्र व यूजीसी से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत ने टिप्पणी की कि नियमों की परिभाषा व्यापक सामाजिक प्रभाव डाल सकती है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
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याचिकाओं में कहा गया है कि भेदभाव की परिभाषा को सीमित कर देने से अन्य वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। फिलहाल 2012 के पूर्व नियम प्रभावी हैं, जब तक कि अदालत अंतिम निर्णय न दे दे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा शिक्षा नीति, सामाजिक न्याय और संवैधानिक व्याख्या से जुड़ा है। आने वाले समय में न्यायालय के फैसले और सरकार के रुख पर सबकी नजर रहेगी।