ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर मोबाइल टैरिफ तक

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खुदरा महंगाई दर को मापने की प्रणाली में बड़ा सुधार करते हुए सरकार ने CPI की नई श्रृंखला लागू कर दी है। अब आधार वर्ष 2012 की जगह 2024 को मानक बनाया गया है। इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव का आकलन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।

नई श्रृंखला में डिजिटल अर्थव्यवस्था को विशेष महत्व दिया गया है। ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर उपलब्ध वस्तुओं की कीमतें सीधे गणना में शामिल की जाएंगी। साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म की सब्सक्रिप्शन फीस, हवाई किराया, टेलीफोन सेवाएं और मोबाइल टैरिफ भी डेटा संग्रह का हिस्सा होंगे। प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के मोबाइल प्लान इंडेक्स में जोड़े गए हैं।

ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर जुटाई जाएंगी, जबकि पारंपरिक बाजारों से मासिक आंकड़े लिए जाएंगे। इससे डेटा अधिक अद्यतन और सटीक रहेगा। रेल किराया और डाक शुल्क जैसे आंकड़े संबंधित विभागों से प्राप्त किए जाएंगे।

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महंगाई टोकरी में वस्तुओं और सेवाओं की संख्या बढ़ाकर 358 कर दी गई है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के वास्तविक खर्च को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना और डिजिटल उपभोग के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखकर किया गया है।

खाने-पीने की वस्तुओं के भार में कमी कर संतुलन स्थापित किया गया है, जिससे महंगाई दर में उतार-चढ़ाव का आकलन अधिक संतुलित और वास्तविक हो सके। नई प्रणाली से उम्मीद है कि महंगाई के आंकड़े आम उपभोक्ताओं के अनुभव के अधिक करीब होंगे।

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