तिब्बत में सुबह आया भूकंप, 3.0 तीव्रता के झटकों से हिली धरती

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बुधवार सुबह तिब्बत में अचानक भूकंप के झटकों ने लोगों को चौंका दिया। सुबह के शांत माहौल में धरती के हिलने से लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.0 मापी गई और इसका केंद्र जमीन से लगभग 10 किलोमीटर नीचे था।

हालांकि यह भूकंप मध्यम से कम तीव्रता का था, लेकिन उथले होने के कारण झटके स्पष्ट महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

तिब्बत क्यों रहता है संवेदनशील

तिब्बत का पठारी इलाका भूकंपीय दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है। यह क्षेत्र भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के टकराव क्षेत्र में स्थित है। यही कारण है कि यहां अक्सर हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे भूकंप भविष्य में बड़े झटकों की चेतावनी भी हो सकते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में सतर्कता बेहद जरूरी है।

मणिपुर, लद्दाख और दिल्ली में भी हालिया झटके

तिब्बत से पहले मणिपुर के कामजोंग जिले में 3.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इसके अलावा 19 जनवरी को लेह-लद्दाख में 5.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे इलाके में दहशत फैल गई थी। उसी दिन दिल्ली में भी सुबह के समय हल्के झटके महसूस किए गए थे।

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इन घटनाओं से यह साफ होता है कि उत्तरी भारत और हिमालयी क्षेत्र लगातार भूकंपीय हलचलों का सामना कर रहे हैं।

उथले भूकंप क्यों बनते हैं खतरा

भूवैज्ञानिक बताते हैं कि उथले भूकंप ज्यादा खतरनाक इसलिए होते हैं क्योंकि उनकी ऊर्जा जमीन की सतह के पास ही निकलती है। इससे इमारतों में कंपन ज्यादा होता है और नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि तिब्बत में आया यह भूकंप कम तीव्रता का था, इसलिए बड़ा खतरा टल गया।

विशेषज्ञों की सलाह है कि भूकंप के दौरान खुले स्थान में चले जाएं, भारी वस्तुओं से दूर रहें और अफवाहों पर ध्यान न दें। भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपातकालीन तैयारी हमेशा रखनी चाहिए।

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