असम की राजनीति में इस समय बयानबाज़ी का स्तर लगातार तीखा होता जा रहा है। Himanta Biswa Sarma और Rahul Gandhi के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।
राहुल गांधी ने अपने हालिया असम दौरे में राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में “लैंड एटीएम” जैसी व्यवस्था चल रही है, जहां आम लोगों की जमीन लेकर बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने सरमा को देश का “सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री” तक बता दिया और दावा किया कि कांग्रेस के सत्ता में आते ही उन्हें जेल भेजा जाएगा।
इस बयान के बाद सरमा ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि राहुल गांधी खुद कानूनी मामलों में घिरे हुए हैं और जमानत पर बाहर हैं, इसलिए उन्हें दूसरों पर उंगली उठाने से पहले खुद को देखना चाहिए।
राजनीतिक रूप से यह मुकाबला और दिलचस्प इसलिए भी हो जाता है क्योंकि सरमा खुद कभी कांग्रेस का हिस्सा रह चुके हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुए। इस वजह से राहुल गांधी उन्हें “धोखा देने वाला नेता” भी मानते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह टकराव सिर्फ व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं की लड़ाई भी है। एक तरफ भाजपा विकास और शासन के मुद्दों को आगे रख रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस भ्रष्टाचार और जनहित के सवाल उठा रही है। चुनावी राजनीति में इस तरह के तीखे बयान आम होते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि असली मुद्दों—जैसे रोजगार, विकास और शिक्षा—पर भी चर्चा हो।