पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का मामला अब सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र और मानवाधिकारों की वैश्विक बहस का हिस्सा बनता जा रहा है। लंदन में रह रहे उनके बेटे सुलेमान खान और कासिम खान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान सरकार उन्हें जानबूझकर वीज़ा नहीं दे रही, ताकि वे अपने बीमार पिता से न मिल सकें।
इमरान खान, जो कभी पाकिस्तान की सत्ता के केंद्र में थे, आज उसी देश की जेल में बंद हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें पिछले 900 दिनों से एकांत कारावास में रखा गया है, जहां न तो परिवार से मुलाकात की इजाजत है और न ही निजी डॉक्टरों तक पहुंच।
पिता से मिलने का अधिकार भी छीना
कासिम खान ने कहा कि उनके पिता की हालत लगातार बिगड़ रही है और उन्हें CRVO जैसी गंभीर आंखों की बीमारी का खतरा है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें आंख की नस में ब्लॉकेज हो जाता है और समय पर इलाज न हो तो रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न सिर्फ इलाज में देरी कर रही है, बल्कि परिवार से मिलने तक नहीं दे रही। उनके मुताबिक, यह किसी भी सभ्य लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।
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सरकार बनाम परिवार के दावे
पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने दावा किया है कि इमरान खान की सेहत स्थिर है और उन्हें जरूरी इलाज दिया गया है। लेकिन पीटीआई और खान के परिवार का कहना है कि यह आधा सच है। उनके अनुसार, जेल में दी जा रही चिकित्सा सुविधाएं नाकाफी हैं और भरोसेमंद डॉक्टरों को मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही।
लोकतंत्र पर बड़ा सवाल
इमरान खान के बेटों का कहना है कि यह सिर्फ उनके परिवार का मामला नहीं है, बल्कि पूरे पाकिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य का सवाल है। जब एक पूर्व प्रधानमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम नागरिकों के अधिकार कितने सुरक्षित हैं, यह सोचने की बात है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर ध्यान दे और बहुत देर होने से पहले कार्रवाई करे।