चांदी की कीमतों में इन दिनों तूफानी तेजी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी डॉलर की कमजोरी के बीच निवेशकों का रुझान तेजी से चांदी की ओर बढ़ा है। सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर चांदी की बढ़ती मांग ने इसकी कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है।
वैश्विक बाजार में चांदी करीब 115 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही है, जबकि घरेलू बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इसके दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं। बुधवार, 28 जनवरी को MCX पर मार्च 2026 एक्सपायरी वाली चांदी वायदा कीमतों ने 3.83 लाख रुपये प्रति किलो का उच्च स्तर छू लिया।
कारोबारी दिन की शुरुआत चांदी ने 3,64,821 रुपये प्रति किलो पर की थी। हालांकि, दिन चढ़ने के साथ ही इसमें जोरदार खरीदारी देखने को मिली और दोपहर करीब 3 बजे यह 3,76,899 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही थी। पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले चांदी में करीब 20,500 रुपये प्रति किलो की तेजी दर्ज की गई।
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इस तेज उछाल के पीछे कई अहम कारण माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण चीन की मजबूत मांग है। चीन में खुदरा निवेशक बड़ी संख्या में चांदी में निवेश कर रहे हैं। हाल ही में वहां एक सिल्वर फंड को अस्थायी रूप से ट्रेडिंग रोकनी पड़ी थी, क्योंकि उसका प्रीमियम नेट एसेट वैल्यू (NAV) से काफी ऊपर चला गया था। यह संकेत देता है कि चीनी निवेशक चांदी को लेकर बेहद आशावादी हैं।
इतना ही नहीं, चीन के मैन्युफैक्चरर्स भी अब चांदी की ज्वेलरी बनाने के बजाय 1 किलोग्राम के सिल्वर बार तैयार करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि चांदी अब केवल आभूषण की धातु नहीं, बल्कि निवेश का मजबूत जरिया बनती जा रही है।
अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने भी चांदी को बड़ा सहारा दिया है। डॉलर इंडेक्स पिछले चार साल के निचले स्तर के आसपास पहुंच चुका है, जिससे कीमती धातुओं में निवेश आकर्षक हो गया है। साथ ही, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी केवल सट्टा आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मजबूत वैश्विक मांग और आर्थिक परिस्थितियां हैं। ऐसे में चांदी की कीमतों में लंबी अवधि तक मजबूती बने रहने की संभावना जताई जा रही है।