उत्तर प्रदेश के रायबरेली दौरे पर पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए यह यात्रा कई मायनों में खास बन गई। जहां एक ओर उन्होंने खेल और जनसंपर्क कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, वहीं दूसरी ओर उन्हें अपने परिवार की एक अनमोल विरासत भी मिली। रायबरेली के एक परिवार ने राहुल गांधी को उनके दादा फिरोज गांधी का पुराना ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा, जिसे देखकर वह भावुक हो गए।
सूत्रों के मुताबिक, यह ड्राइविंग लाइसेंस वर्षों से एक स्थानीय परिवार के पास सुरक्षित रखा गया था। परिवार का कहना है कि यह दस्तावेज उनके लिए ऐतिहासिक धरोहर जैसा था और वे इसे सही समय पर गांधी परिवार को लौटाना चाहते थे। राहुल गांधी के रायबरेली आगमन पर उन्हें यह अवसर मिला। यह भावनात्मक क्षण उस समय सामने आया जब राहुल गांधी राजीव गांधी स्टेडियम में रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए थे। मंच पर पहुंचे परिवार ने जब लाइसेंस उन्हें सौंपा, तो राहुल गांधी कुछ क्षणों के लिए भावनाओं में डूब गए।

उन्होंने लाइसेंस को ध्यान से देखा और उसे अपने दादा की स्मृति से जोड़ते हुए यादों में खोते नजर आए।
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राहुल गांधी ने तुरंत उस लाइसेंस की तस्वीर लेकर अपनी मां सोनिया गांधी को भेजी। कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह पल राहुल गांधी के लिए बेहद खास था। अमेठी सांसद किशोरी लाल शर्मा ने भी सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि की और कहा कि यह रायबरेली की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है। क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन के दौरान राहुल गांधी ने युवाओं से बातचीत की और खेलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक विकास का माध्यम हैं, बल्कि युवाओं में नेतृत्व और अनुशासन भी विकसित करते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इसके बाद राहुल गांधी ने जिले में आयोजित मनरेगा चौपाल में भी भाग लिया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि मनरेगा गरीबों के लिए सिर्फ रोजगार योजना नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी इस योजना को कमजोर नहीं होने देगी। रायबरेली दौरे के दौरान राहुल गांधी का यह भावुक पल सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने इसे गांधी परिवार और रायबरेली के बीच पुराने संबंधों का प्रतीक बताया। यह उपहार न केवल एक दस्तावेज था, बल्कि उस ऐतिहासिक रिश्ते की याद भी, जो दशकों से रायबरेली और गांधी परिवार के बीच बना हुआ है।