- डॉक्टर रमीज के लैपटॉप से कॉल गर्ल्स और ‘जन्नत’ फोल्डर का खुलासा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में KGMU धर्मांतरण मामले की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सबूत हाथ लगे हैं, जिन्होंने पूरे केस को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। आरोपी डॉक्टर रमीज से हुई लंबी पूछताछ के बाद सामने आया है कि वह वर्षों से अपनी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड संभालकर रखता था।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी के पास से बरामद दो लैपटॉप और मोबाइल फोन की जांच में बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मिली है। इनमें ‘जन्नत’ नाम का एक फोल्डर भी शामिल है, जिसमें कथित तौर पर हिंदू लड़कियों से जुड़ा डेटा संग्रहित किया गया था। पुलिस का मानना है कि यह डेटा किसी सुनियोजित गतिविधि का हिस्सा हो सकता है, हालांकि इसकी पुष्टि फॉरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही होगी।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के लैपटॉप में कॉल गर्ल्स से संबंधित एक अलग सूची मौजूद थी। इस फोल्डर में कई मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारियां दर्ज थीं। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि इस डेटा का इस्तेमाल किन लोगों को प्रभावित करने या फंसाने के लिए किया गया।
48 घंटे की रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपी से 100 से अधिक सवाल पूछे। धर्मांतरण से जुड़े सीधे सवालों पर आरोपी ने जवाब देने से परहेज किया। महिला रेजिडेंट डॉक्टर पर कथित दबाव, मेडिकोज ग्रुप की भूमिका और आगरा के डॉक्टर परवेज से संपर्क जैसे मुद्दों पर भी उसने कोई ठोस जानकारी नहीं दी।
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पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी ने कई चैट और कॉल डिटेल्स डिलीट कर दी थीं, जिन्हें अब फॉरेंसिक टीम की मदद से रिकवर किया जा रहा है। STF भी इस पूरे मामले की अलग से जांच कर रही है। नेपाल सीमा से जुड़े संपर्कों और आरोपी की हालिया गतिविधियों को लेकर भी जानकारी जुटाई जा रही है।
पूछताछ में आरोपी ने यह स्वीकार किया कि वह पीड़िता के संपर्क में था और मुलाकातें होती थीं, लेकिन उसने अपने माता-पिता की किसी भी भूमिका से इनकार किया है। पीड़िता ने भी आरोपी से आमने-सामने मिलने से इनकार कर दिया, जिसके चलते पुलिस ने दोनों का सामना नहीं कराया।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी नशे की हालत में कई आपत्तिजनक गतिविधियों को अंजाम देता था। उसके दूसरे लैपटॉप से 50 से अधिक वीडियो बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी निजी जिंदगी से जुड़े दृश्य भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इन वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग या दबाव बनाने के लिए किया गया या नहीं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अभी शुरुआती जांच के दौर में है। सभी डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क और मंशा का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल, KGMU धर्मांतरण मामला प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।