उत्तर प्रदेश के संभल जिले में सीजेएम विभांशु सुधीर के ट्रांसफर को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। लखनऊ में दिए बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट इस मामले को नजरअंदाज नहीं करेंगे।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि इससे न्यायिक व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश के जिम्मेदार नागरिक, बुद्धिजीवी और न्यायप्रिय लोग इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे। उनका यह बयान सीओ अनुज चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश के बाद आए ट्रांसफर के संदर्भ में माना जा रहा है।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार आलोचना और सवालों से बचने के लिए अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका की भूमिका बेहद अहम होती है और अगर न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के बाद ऐसे कदम उठते हैं, तो यह चिंताजनक है।
इसी दिन अखिलेश यादव ने पार्टी के सांसदों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की। इस बैठक में आगामी चुनावों की रणनीति, संगठन विस्तार और विधानसभा स्तर पर तैयारी को लेकर चर्चा हुई। अखिलेश ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सांसद ही 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की रीढ़ साबित होंगे।
उन्होंने हर संसदीय क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की और कार्यकर्ताओं को जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। सपा नेतृत्व का मानना है कि संगठन को मजबूत कर ही सरकार को चुनौती दी जा सकती है। अखिलेश यादव के इस बयान को आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।