70वें जन्मदिन पर मायावती का सियासी संदेश

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लखनऊ में अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी अब भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल के साथ समझौता नहीं करेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भाजपा, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर एक समान हमला करते हुए कहा कि सभी दल बसपा की नीतियों की नकल कर रहे हैं, लेकिन मूल भावना को अपनाने से बच रहे हैं।

मायावती ने कहा कि बसपा सरकार में शुरू की गई योजनाओं को आज की सरकारें नए नामों से चला रही हैं। उन्होंने इसे बहुजन आंदोलन की वैचारिक जीत बताया। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांशीराम के निधन के समय सत्ता में बैठे लोगों ने उनके योगदान को नजरअंदाज किया।

ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान ने खासा राजनीतिक संदेश दिया। मायावती ने कहा कि सम्मान केवल प्रतीकात्मक आयोजनों से नहीं मिलता, बल्कि सत्ता और भागीदारी से मिलता है। उन्होंने दो टूक कहा कि बसपा सभी समाजों को बराबरी का सम्मान देती है।

चुनावी रणनीति पर बोलते हुए मायावती ने कहा कि गठबंधन हमेशा बसपा के मूल वोट बैंक को कमजोर करता है। अपर कास्ट का वोट जातिवादी दलों को चला जाता है, इसलिए पार्टी को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव में बसपा पूरी ताकत के साथ अकेले मैदान में उतरेगी।

ईवीएम और एसआईआर को लेकर मायावती ने आशंका जताई कि इन व्यवस्थाओं का दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सजग रहने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सतर्क रहने का आह्वान किया।

प्रेस वार्ता के दौरान शॉर्ट सर्किट से कार्यक्रम बाधित हुआ, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते किसी तरह की अनहोनी नहीं हुई।

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