- 108 घोड़ों संग शौर्य यात्रा और डमरू वादन की झलक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को गुजरात के पवित्र सोमनाथ मंदिर में आयोजित शौर्य यात्रा में भाग लेकर एक बार फिर सनातन परंपरा और राष्ट्रीय स्वाभिमान के प्रति अपनी आस्था को प्रकट किया। यह शौर्य यात्रा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम का अहम हिस्सा थी, जो 1026 में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद भी मंदिर की अडिग आस्था और निरंतर पुनर्जागरण का प्रतीक मानी जाती है।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना की और दोनों हाथों से डमरू बजाकर धार्मिक वातावरण को और भी ऊर्जावान बना दिया। इस दौरान 108 घोड़ों से सुसज्जित शौर्य यात्रा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। ये घोड़े गुजरात पुलिस की माउंटेड यूनिट से जुड़े थे, जिन्हें इस आयोजन के लिए विशेष रूप से आठ महीने तक प्रशिक्षित किया गया था। इनमें काठियावाड़ी और मारवाड़ी नस्ल के घोड़े शामिल थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक फूलों से सजे खुले वाहन में यात्रा के दौरान खड़े नजर आए। उनके साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद रहे। यात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं, साधु-संतों, बच्चों और स्थानीय नागरिकों ने प्रधानमंत्री का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

पीएम मोदी ने इस अवसर पर देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने आज़ादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही उन्होंने उन वीर योद्धाओं को भी नमन किया, जिन्होंने मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
खेड़ा जिले के ब्रह्मर्षि संस्कृत महाविद्यालय के लगभग 350 छात्रों ने डमरू और शंख वादन करते हुए शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया। संस्थान के प्रतिनिधियों ने बताया कि छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में सहभागिता निभाई।
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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक दृढ़ता, ऐतिहासिक संघर्ष और पुनर्निर्माण की भावना को भी दर्शाता है।