श्रीलंका की मदद को आगे आया INS विक्रांत

अंतर्राष्ट्रीय
  • भारतीय नौसेना ने दिखाया मानवीय साहस—समुद्र, आकाश और बंदरगाहों के माध्यम से तेजी से राहत पहुंचाई; INS उदयगिरि और INS सुकन्या भी अभियान में शामिल।

भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत ने एक बार फिर मानवता और क्षेत्रीय सहयोग की मिसाल पेश की है। श्रीलंका में आए विनाशकारी चक्रवात ‘दित्वाह’ (Cyclone Ditwah) के बाद वहां के कई तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में हालात गंभीर हो गए हैं। इसी संकट के बीच भारतीय नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य प्रभावित लोगों तक त्वरित सहायता पहुंचाना है।

INS विक्रांत के साथ INS उदयगिरि, INS सुकन्या और अन्य युद्धपोत पहले से श्रीलंका नौसेना के 75वें स्थापना दिवस और अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए कोलंबो में मौजूद थे। लेकिन चक्रवात के कारण जब श्रीलंका में व्यापक तबाही हुई, तो भारतीय नौसेना ने तुरंत अपने जहाजों को HADR (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) मोड में बदल दिया।

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INS विक्रांत पर मौजूद Sea King और ALH Dhruv हेलीकॉप्टरों ने श्रीलंका के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में हवाई सर्वेक्षण कर हजारों लोगों तक भोजन, पीने का पानी, मेडिकल किट और तिरपाल पहुँचाया। कई गांव बारिश और बाढ़ के कारण पूरी तरह कट चुके थे, इसलिए हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत सामग्री एयर-ड्रॉप की गई।

युद्धपोतों से हजारों टन राहत सामग्री श्रीलंकाई प्रशासन को सौंपी गई है। भारतीय वायुसेना के C-17 और IL-76 परिवहन विमान भी लगातार कोलंबो और त्रिंकोमाली हवाई अड्डों पर राहत सामग्री उतार रहे हैं।

चक्रवात की वजह से श्रीलंका के कई हिस्सों में सड़कें, पुल और संचार मार्ग टूट चुके हैं, जिससे समुद्री मार्ग ही सबसे तेजी से राहत पहुंचाने का एकमात्र विकल्प बचा है। भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच रियल-टाइम समन्वय जारी है, ताकि सहायता तुरंत और सही जगह पहुंच सके।

यह पूरा अभियान भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति और SAGAR – Security and Growth for All in the Region विजन का सर्वोत्तम उदाहरण है। हिंद महासागर क्षेत्र में आने वाले संकटों में सबसे पहले पहुंचकर सहायता देने की परंपरा को भारतीय नौसेना ने एक बार फिर मजबूत किया है।

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