संचार साथी ऐप: अनिवार्य से वैकल्पिक तक, 24 घंटे में सरकार का यू-टर्न

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने 1 दिसंबर 2025 को सभी स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि नई डिवाइसों में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल रहेगा और पुराने फोनों में यह OTA अपडेट के जरिए आएगा। इस खबर के वायरल होते ही पूरे देश में हंगामा मच गया। लोगों ने इसे “सरकारी जासूसी ऐप” करार दे दिया। सोशल मीडिया पर #UninstallSancharSaathi और #SpyApp ट्रेंड करने लगे। विपक्ष, खासकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे “तानाशाही की नई मिसाल” और “पेगासस-2” बताया।

बस 24 घंटे बाद ही, 2 दिसंबर 2025 को केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने साफ कहा:

ऐप को चलाना 100% वैकल्पिक है

डिफॉल्ट में यह बंद रहेगा, यूज़र खुद चाहे तो चालू करे

कभी भी पूरा ऐप अनइंस्टॉल किया जा सकता है

इसमें कोई कॉल टैपिंग, मैसेज पढ़ना या लोकेशन ट्रैकिंग की सुविधा सरकार के पास नहीं है

इसका एकमात्र मकसद साइबर ठगी, फिशिंग और फर्जी कॉल्स से बचाव है

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सिंधिया ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “जो लोग भ्रम फैला रहे हैं, वे शायद खुद फ्रॉड कॉल्स से परेशान नहीं होते। यह ऐप आम आदमी को बचाने के लिए है, डराने के लिए नहीं।”

वास्तव में संचार साथी कोई नया ऐप नहीं है। यह पहले से चल रहे CEIR (फोन चोरी होने पर ब्लॉक करने की सुविधा) और चक्षु (फ्रॉड नंबर रिपोर्ट करने की सुविधा) पोर्टल का मोबाइल वर्जन मात्र है। सरकार का तर्क था कि ज्यादातर लोग पोर्टल तक नहीं पहुंच पाते, इसलिए ऐप हर फोन में हो तो सुविधा बढ़ेगी। लेकिन जिस तरह से इसे जबरन थोपने की कोशिश की गई, उसने जनता का गुस्सा भड़का दिया।

ऐप की परमिशन्स को लेकर भी सवाल उठे थे — कैमरा, कॉन्टैक्ट्स, लोकेशन, SMS आदि। लेकिन ये परमिशन्स वही हैं जो Truecaller, WhatsApp, Paytm जैसे तमाम ऐप्स मांगते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि ये ऐप सरकार का है, इसलिए शक ज्यादा हो गया।

अंत में सरकार को झुकना पड़ा और ऐप को पूरी तरह वैकल्पिक घोषित करना पड़ा। अब नई डिवाइसों में यह आएगा जरूर, लेकिन बंद हालत में। यूज़र चाहे तो खोले, चाहे डिलीट कर दे। पुराने फोनों में भी यही नियम लागू होगा।

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