बिहार में 1 दिसंबर से शीतकालीन सत्र

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बिहार में नई सरकार के गठन के बाद विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। यह सत्र 5 दिसंबर तक चलेगा, जिसके दौरान कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। राजधानी पटना में सत्र को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को विशेष रूप से कड़ा कर दिया गया है। प्रशासन ने विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में धारा 163 लागू करते हुए किसी भी प्रकार की भीड़, विरोध प्रदर्शन, जुलूस और हथियार लेकर आने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

सत्र शुरू होने से पहले महागठबंधन ने आज अहम बैठक बुलाई, जिसमें आने वाले दिनों की रणनीति और सदन में उठाए जाने वाले मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने बताया कि पार्टी लगातार विधानसभा सत्र की तैयारी में जुटी है। यह सत्र इसलिए भी अहम है क्योंकि इसमें नए विधायकों का शपथ ग्रहण और विधानसभा स्पीकर का चुनाव भी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अभी भी यह सवाल पूछ रही है कि महागठबंधन को मिले वोट आखिर गए कहां। लोगों में यह भ्रम है कि एनडीए सरकार कैसे बनी।

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आरजेडी नेता शक्ति यादव ने एनडीए पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान मतदाताओं के खातों में पैसे डालकर वोट खरीदे गए। यहां तक कि मतदान की प्रक्रिया चल रही थी, तब भी लोगों के बैंक खातों में धन भेजा गया। शक्ति यादव ने दावा किया कि यह पहली बार हुआ है जब चुनाव आयोग पर पक्षपात करने का आरोप इतना खुलकर लगाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है और इस मुद्दे को सदन में मजबूती के साथ उठाया जाएगा।

कांग्रेस विधायक समीर सिंह ने भी बैठक के बाद कहा कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने साफ किया कि दलों के बीच किसी भी प्रकार का मनमुटाव नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि चुनाव प्रचार के दौरान कुछ चूकें हुई थीं, जिन पर समीक्षा की जा रही है। सत्र के दौरान जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को प्राथमिकता के साथ उठाने की तैयारी की जा रही है।

इस बीच, 1 से 5 दिसंबर के दौरान विधानसभा और सचिवालय क्षेत्र में विशेष मार्गों पर प्रतिबंध रहेगा। केवल अधिकृत अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और कुछ विशेष अनुमति प्राप्त लोगों को ही आवागमन की अनुमति होगी। सुरक्षा और राजनीतिक गतिविधियों के बीच यह सत्र बिहार की राजनीति में कई नए मोड़ ला सकता है।

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