उत्तर प्रदेश के मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने बलिया में आयोजित एक जनसभा के दौरान ऐसा बयान दिया है जिससे राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भारत संविधान से चलता है, न कि शरीयत से, और जो भी व्यक्ति देश की संवैधानिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है, उसका अपराध वहीं से शुरू हो जाता है। उनके इस बयान को धार्मिक और संवैधानिक मुद्दों पर चल रही मौजूदा बहसों से जोड़कर देखा जा रहा है।
संजय निषाद ने सभा में स्पष्ट कहा, “अगर हमारे देश की संवैधानिक व्यवस्था पर कोई सवाल उठाता है, तो समझिए पहला अपराध वहीं से शुरू होता है। यह देश संविधान से चलता है, शरीयत से नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि दोषी कौन है यह अदालत तय करती है और कौन-सी गतिविधि अपराध है, यह भारतीय कानून निर्धारित करता है। उनका कहना था कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और ऐसे लोगों को जेल भी भेजा जाता है, जिन्हें कभी-कभी जमानत तक नहीं मिलती।
मंत्री ने अपने भाषण में यह भी ज़ोर दिया कि संविधान देश की नींव है, और कानून व्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए इसका सम्मान करना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग धार्मिक मुद्दों के नाम पर जानबूझकर न्यायिक व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसे प्रयास लंबे समय तक नहीं चल पाते।
बयान के सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर हमला तेज कर दिया। विपक्ष का कहना है कि मंत्रियों के ऐसे बयान समाज में अनावश्यक ध्रुवीकरण पैदा करते हैं और सरकार को इस तरह के वक्तव्यों से बचना चाहिए। वहीं, संजय निषाद के समर्थकों का कहना है कि मंत्री ने केवल संविधान की सर्वोच्चता की बात कही है, इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। लोग दो खेमों में बंट गए हैं—एक वर्ग इसे संविधान की ताकत को दोहराने वाला वक्तव्य बता रहा है, जबकि दूसरा इसे धार्मिक भावनाओं को उकसाने वाला बयान मान रहा है।