नई दिल्ली: गुवाहाटी से बेंगलुरु जा रही इंडिगो की फ्लाइट रविवार को केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान असामान्य स्थिति का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि विमान ने लैंडिंग की दूसरी कोशिश के दौरान रनवे से असामान्य संपर्क किया। घटना के बाद विमान में सवार यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, राहत की बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री और क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं।
इंडिगो के प्रवक्ता के मुताबिक, फ्लाइट नंबर 6E 6542 बेंगलुरु एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान तेज हवाओं के बीच असामान्य स्थिति में फंस गई। लैंडिंग के दौरान विमान का रनवे से असामान्य संपर्क हुआ। घटना के तुरंत बाद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को विमान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
SOP के तहत अधिकारियों को दी गई जानकारी
इंडिगो ने बताया कि घटना की जानकारी निर्धारित Standard Operating Procedure (SOP) के तहत सभी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। एयरलाइन की ओर से घटना के बाद जरूरी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
प्रवक्ता के अनुसार, विमान की विस्तृत मेंटेनेंस जांच की जा रही है। विमान को दोबारा उड़ान भरने की अनुमति तभी दी जाएगी, जब जरूरी तकनीकी निरीक्षण पूरे हो जाएं और संबंधित अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी मिल जाए।
दूसरे लैंडिंग प्रयास के दौरान हुई घटना
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना विमान के दूसरे लैंडिंग प्रयास के दौरान हुई। ऐसी स्थिति को आम तौर पर टेल स्ट्राइक कहा जाता है, जब टेक-ऑफ या लैंडिंग के दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से संपर्क कर लेता है।
हालांकि, इस घटना में वास्तव में क्या हुआ और इसके पीछे सटीक कारण क्या था, इसकी आधिकारिक जांच अभी बाकी है। तेज हवाओं को घटना से जुड़ा एक संभावित कारक बताया जा रहा है, लेकिन अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पहले भी सामने आया था इंडिगो फ्लाइट से जुड़ा मामला
सितंबर में इंडिगो की एक अन्य उड़ान में भी तकनीकी समस्या सामने आई थी। 1 सितंबर को गोवा से दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट, जिसमें 229 यात्री सवार थे, इंजन में तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद मनोहर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लौट आई थी। विमान ने उड़ान भरने के करीब 45 मिनट बाद सुरक्षित लैंडिंग की थी। इसके बाद विमान को मेंटेनेंस जांच के लिए भेजा गया था।
बेंगलुरु की ताजा घटना के बाद विमान को आवश्यक तकनीकी निरीक्षण से गुजरना होगा। जांच और मंजूरी पूरी होने के बाद ही इसे दोबारा सेवा में शामिल किया जाएगा।