राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को किया नमन
लाल किले पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजघाट गए। यहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को भी नमन किया। इसके बाद वह लाल किले पहुंचे, जहां रक्षा मंत्री और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर खास आयोजन
इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह इसलिए भी खास रहा क्योंकि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर लाल किले से पहली बार इसका सामूहिक गायन किया गया। समारोह के दौरान ज्ञानपथ पर भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के कैडेट्स के साथ ‘मेरा भारत’ के करीब 2,500 युवाओं ने मिलकर ‘वंदे मातरम’ की विशाल मानव आकृति बनाई। इस दृश्य ने समारोह में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का रंग और गहरा कर दिया।
‘विकसित भारत@2047’ पर रहा पूरा फोकस
इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम ‘विकसित भारत@2047 के लिए युवा शक्ति’ और ‘वंदे मातरम के 150 वर्ष’ रखी गई। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवा शक्ति को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया।
समारोह में भारत की सांस्कृतिक विविधता, राष्ट्रीय एकता और आत्मनिर्भरता की झलक भी देखने को मिली। देशभर से आए युवाओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि विकसित भारत के निर्माण में नई पीढ़ी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। लाल किले से तिरंगे के साथ गूंजता ‘वंदे मातरम’ का स्वर इस ऐतिहासिक स्वतंत्रता दिवस समारोह का प्रमुख आकर्षण बना।