काबुल/नई दिल्ली। अफगानिस्तान के पूर्वी प्रांत नूरिस्तान में आई भीषण फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) ने भारी तबाही मचा दी है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ से पारुन शहर और आसपास के कई गांव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई घर पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं और सड़कों, पुलों सहित बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। राहत एवं बचाव दल लापता लोगों की तलाश में लगातार अभियान चला रहे हैं।
प्रशासन के मुताबिक अचानक हुई भारी बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण नदियों और पहाड़ी नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है। नूरिस्तान जैसे पहाड़ी और दूर-दराज़ क्षेत्रों में मिट्टी के बने मकान तथा सीमित संसाधन इस जोखिम को और अधिक गंभीर बना देते हैं।
बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए हैं। खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से राहत एवं बचाव कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्वास्थ्य केंद्र भी प्रभावित हुए हैं, जिससे घायलों तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाना चुनौती बन गया है।
अफगानिस्तान की नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (ANDMA) और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है तथा भोजन, दवाइयों और अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय राहत एजेंसियों से भी सहयोग की अपील की है।
प्रशासन ने लोगों से नदी किनारों, निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करें, अफवाहों से बचें और आपात स्थिति के लिए आवश्यक दवाइयों, पीने के पानी, भोजन, टॉर्च और अन्य जरूरी सामान का प्रबंध रखें।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वनों का संरक्षण, बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचे का निर्माण, मजबूत आवास, बेहतर संचार व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए दीर्घकालिक योजनाओं और सतत विकास पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।