राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवाल! निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से मांगा बड़ा हस्तक्षेप

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राम मंदिर निर्माण से जुड़े ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर कर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन, ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव और वित्तीय लेन-देन की फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है।

याचिका में कहा गया है कि 9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले की भावना के अनुरूप ट्रस्ट का गठन नहीं किया गया। अखाड़े का आरोप है कि ट्रस्ट में ऐसे लोगों को शामिल किया गया है, जिनका राम जन्मभूमि आंदोलन, रामानंदी परंपरा या मंदिर की ऐतिहासिक व्यवस्था से कोई सीधा संबंध नहीं रहा। साथ ही, कुछ ट्रस्टियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का भी उल्लेख करते हुए अखाड़े ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

निर्मोही अखाड़ा का कहना है कि वह वर्षों तक राम जन्मभूमि मामले का पक्षकार रहा है और मंदिर की पारंपरिक सेवा-पूजा से उसका ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में ट्रस्ट में उसका प्रतिनिधित्व होना आवश्यक है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि मंदिर की पूजा-अर्चना और धार्मिक परंपराओं का संचालन रामानंदी संप्रदाय की परंपराओं के अनुसार कराया जाए।

अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार को ट्रस्ट डीड में संशोधन करने का निर्देश दिया जाए और ट्रस्ट के संचालन की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र बोर्ड गठित किया जाए। इसके अलावा ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच और 2019 के फैसले के अनुपालन की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाए जाने की भी मांग की गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है।

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