मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रविवार को ईरान ने दावा किया कि उसने इस्फहान परमाणु केंद्र के पास अमेरिकी सेना के एक C-130 विमान को मार गिराया है। यह दावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और सरकारी मीडिया द्वारा किया गया है।
ईरानी एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, इस कार्रवाई को स्थानीय सुरक्षा बलों के सहयोग से अंजाम दिया गया। इसके साथ ही, ईरान ने यह भी कहा कि उसने हाल ही में अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को भी गिराया है।
पिछले डेढ़ दिन में ईरान ने कई अमेरिकी सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने का दावा किया है, जिनमें अत्याधुनिक फाइटर जेट्स—F-35, F-15, F-16 और A-10—शामिल हैं। इसके अलावा हेलीकॉप्टर और क्रूज मिसाइलों को भी नष्ट करने की बात कही गई है। हालांकि, इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, जिससे स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच, अमेरिका और इजरायल द्वारा इस्फहान परमाणु केंद्र पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। रविवार को यह पांचवां हमला था, जिसे अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों के बावजूद अंजाम दिया गया।
परमाणु सुरक्षा को लेकर चिंतित आईएईए ने पहले ही ऐसे हमलों से बचने की अपील की थी। इसके बावजूद जारी हमलों ने वैश्विक समुदाय को चिंता में डाल दिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अगर परमाणु केंद्र को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे पूरे मध्य-पूर्व में रेडियोधर्मी खतरा फैल सकता है, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं रह गया है, बल्कि इसमें परमाणु सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति जैसे गंभीर मुद्दे जुड़ चुके हैं। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसके परिणाम बेहद विनाशकारी हो सकते हैं।