Aam Aadmi Party के सात सांसदों के पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर अब समाजसेवी Anna Hazare का पहला बयान सामने आया है। अन्ना हजारे ने साफ शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी पसंद के अनुसार कहीं भी जाने और रहने का अधिकार है, लेकिन अगर इतने लोग एक साथ पार्टी छोड़ रहे हैं तो इसके पीछे पार्टी और संगठन की कमी जरूर है।
अन्ना हजारे ने कहा, “कहां जाना और कहां रहना, यह लोकतंत्र में हर व्यक्ति का अधिकार है। किसी पर जबरदस्ती करना ठीक नहीं है। अगर सात सांसद पार्टी छोड़कर गए हैं, तो जरूर उन्हें कुछ न कुछ दिक्कत रही होगी। इसमें कुछ न कुछ कारण जरूर होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि पार्टी सही तरीके से चल रही होती, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में नेता पार्टी नहीं छोड़ते। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “इसमें दोष पार्टी और संगठन का है। अगर संगठन मजबूत होता और सब कुछ ठीक चलता, तो लोग पार्टी छोड़कर नहीं जाते।”
जब उनसे यह पूछा गया कि जिस आंदोलन से यह पार्टी बनी थी, आज उसी पार्टी में टूट क्यों दिखाई दे रही है, तो अन्ना हजारे ने इस पर भी बेबाक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “जब स्वार्थ आ जाता है, तो लोग टूट जाते हैं। अगर समाज और देश को सामने रखकर काम किया जाए, तो कोई भी पार्टी नहीं छोड़ता।”
अन्ना हजारे ने मौजूदा राजनीति पर चिंता जताते हुए कहा कि आज लोग समाज और देश को भूलते जा रहे हैं और सत्ता तथा पैसे के पीछे भाग रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज लोग देश और समाज को भूल गए हैं। सत्ता और पैसे की दौड़ में आदर्श पीछे छूट गए हैं। यही वजह है कि राजनीति में गड़बड़ी बढ़ रही है।”
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी की शुरुआत भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से हुई थी, जिसमें अन्ना हजारे एक प्रमुख चेहरा थे। बाद में इसी आंदोलन से अलग होकर पार्टी का गठन हुआ। ऐसे में AAP के भीतर इतनी बड़ी टूट को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने से विपक्षी राजनीति में भी नई बहस शुरू हो गई है। भाजपा इसे अपनी नीतियों पर विश्वास बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव और रणनीति का हिस्सा बता रहा है।