देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों के बीच हलचल पैदा कर दी है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और स्वतंत्र निदेशक Atanu Chakraborty ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
अपने इस्तीफे में चक्रवर्ती ने साफ तौर पर कहा कि बैंक के कामकाज के तौर-तरीकों और उनके व्यक्तिगत मूल्यों के बीच टकराव हो रहा था, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला लिया। उनके इस कदम ने बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अतानु चक्रवर्ती गुजरात कैडर के पूर्व IAS अधिकारी रहे हैं और वित्त मंत्रालय में सचिव के पद पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके अनुभव और प्रतिष्ठा को देखते हुए उनका इस्तीफा बैंक के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस्तीफे के तुरंत बाद बैंक ने अनुभवी उद्योग विशेषज्ञ Keki Mistry को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त कर दिया है। इस नियुक्ति को Reserve Bank of India (RBI) की मंजूरी भी मिल चुकी है, जिससे फिलहाल नेतृत्व की स्थिति स्थिर करने की कोशिश की गई है।
चक्रवर्ती ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने बैंक के अंदर कुछ ऐसी गतिविधियां और प्रक्रियाएं देखीं, जो उनके नैतिक मानकों से मेल नहीं खाती थीं। हालांकि उन्होंने बैंक के कर्मचारियों और स्वतंत्र निदेशकों के काम की सराहना भी की, लेकिन शीर्ष प्रबंधन के साथ उनके मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आ गए हैं।
इस घटनाक्रम के बीच बैंक के मैनेजमेंट में भी बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भावेश जवेरी का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त होने वाला है और उन्होंने दोबारा नियुक्ति में रुचि नहीं दिखाई है।
बाजार पर भी इस खबर का असर देखने को मिला है। अमेरिका में लिस्टेड HDFC Bank के ADR में करीब 7% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम बैंक के लिए एक अहम मोड़ हो सकता है। आने वाले दिनों में बैंक की नीतियों और प्रबंधन में पारदर्शिता को लेकर और अधिक ध्यान दिया जा सकता है।