नवरात्रि के पावन दिनों में Durga Saptashati का पाठ विशेष महत्व रखता है। इसे चंडी पाठ के नाम से भी जाना जाता है और यह Markandeya Purana से लिया गया एक पवित्र ग्रंथ है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पाठ को विधि और नियम के साथ करने से साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
दुर्गा सप्तशती में देवी के तीन प्रमुख रूपों—Maa Mahakali, Maa Mahalakshmi और Maa Mahasaraswati—का विस्तृत वर्णन है, जो जीवन के अलग-अलग पहलुओं को संतुलित करने में सहायक माने जाते हैं।
नवरात्रि के दौरान इस पाठ को नौ दिनों में पूरा करने की परंपरा है, जिसे नवाह्निक पाठ कहा जाता है। इसके लिए सुबह या शाम का समय चुनना बेहतर होता है, जब वातावरण शांत हो और ध्यान केंद्रित किया जा सके।
पाठ शुरू करने से पहले संकल्प लेना जरूरी होता है। मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के सामने लाल कपड़ा बिछाकर पुस्तक रखी जाती है और दीप जलाकर पाठ शुरू किया जाता है।
इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है, जैसे—शुद्धता बनाए रखना, सही उच्चारण करना और पाठ के दौरान ध्यान भटकने न देना। साथ ही, बीच में पाठ रोकने से बचना चाहिए और यदि रुकना पड़े तो अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लेना चाहिए।
हर दिन पाठ समाप्त करने के बाद मां दुर्गा से क्षमा याचना करना और अपने कार्य को उन्हें समर्पित करना भी महत्वपूर्ण माना गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह पाठ न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मदद करता है।
नवरात्रि के इस विशेष अवसर पर श्रद्धा और नियम के साथ किया गया दुर्गा सप्तशती पाठ जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।