- भारतीय सेना का बड़ा कदम — ड्रोन तकनीक से लैस ‘अश्नि’ पलटन और ‘भैरव’ यूनिट दुश्मन क्षेत्र में करेगी सटीक कार्रवाई
भारतीय सेना आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रही है। इसी दिशा में पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने बड़ा ऐलान करते हुए बताया कि सेना ने युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए ‘अश्नि’ ड्रोन पलटन और ‘भैरव’ नाम की विशेष यूनिट्स का गठन शुरू कर दिया है। इन नई इकाइयों का उद्देश्य भविष्य के युद्धों में तेज, सटीक और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
पठानकोट में मीडिया से बातचीत के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन तकनीक की भूमिका तेजी से बढ़ी है। इसे देखते हुए भारतीय सेना ने पैदल सेना, तोपखाने और बख्तरबंद रेजिमेंट सहित सभी सैन्य इकाइयों में ड्रोन के उपयोग को एकीकृत करने का निर्णय लिया है। ‘अश्नि’ ड्रोन पलटन को छोटी उप-इकाइयों के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो युद्ध के दौरान निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक हमलों में अहम भूमिका निभाएंगी।
उन्होंने बताया कि सेना ने महसूस किया है कि भविष्य के युद्धों में तेज निर्णय और रियल-टाइम जानकारी बेहद जरूरी होगी। इसी कारण ड्रोन तकनीक को सबसे निचले स्तर तक शामिल किया जा रहा है ताकि सैनिकों की सुरक्षा बढ़े और ऑपरेशन अधिक प्रभावी बन सकें।
इसके साथ ही ‘भैरव’ स्पेशल यूनिट्स को दुश्मन के इलाके में अंदर तक जाकर विशेष अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। ये यूनिट्स छोटी, फुर्तीली और स्वतंत्र रूप से काम करने में सक्षम होंगी, जिससे सेना की आक्रमण क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले समय में ऐसे विशेष दस्तों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है।
लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने यह भी जानकारी दी कि सेना अब अपने ड्रोन स्वयं विकसित और तैयार कर रही है। पश्चिमी कमान की कार्यशालाओं में कई ड्रोन बनाए जा चुके हैं और उनका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। इससे सेना अपनी जरूरतों के अनुसार तकनीक को तेजी से विकसित कर सकेगी और बाहरी निर्भरता भी कम होगी।
उन्होंने कहा कि भारत ने पहले भी आतंकवादी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई कर अपनी क्षमता साबित की है और नई तकनीक के साथ सेना भविष्य की किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। नई ड्रोन आधारित रणनीति भारतीय सेना को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।