मधुमेह या Diabetes केवल शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं, बल्कि यह जीवनशैली से जुड़ा विकार है। गलत खानपान, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता इसके मुख्य कारण माने जाते हैं। आयुर्वेद इसे ‘मधुमेह’ कहता है और शरीर के दोषों के असंतुलन से जोड़ता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में सबसे पहले पाचन तंत्र और मेटाबॉलिज्म को सुधारने पर ध्यान दिया जाता है। इसके लिए कुछ घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं।
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मेथी दाना फाइबर से भरपूर होता है, जो शुगर के अवशोषण को धीमा कर सकता है।
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जामुन बीज पाउडर पारंपरिक चिकित्सा में ब्लड शुगर संतुलित रखने के लिए उपयोग किया जाता है।
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करेला में मौजूद प्राकृतिक तत्व इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाने में मददगार माने जाते हैं।
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आंवला और हल्दी शरीर में सूजन कम कर इम्यूनिटी मजबूत करते हैं।
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सदाबहार का सेवन केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना चाहिए।
सिर्फ जड़ी-बूटियों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण बेहद जरूरी हैं। मीठे और रिफाइंड खाद्य पदार्थों से परहेज करें और हरी सब्जियों को आहार में शामिल करें।
ध्यान रहे, ये उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन दवा बंद करने या बदलने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।