उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में रोजगार और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में देरी और अस्पष्टता से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से खाली पदों की संख्या और भर्ती की समय-सीमा सार्वजनिक करने की मांग की।
सरकार की ओर से वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि सभी प्रमुख भर्तियों के लिए वार्षिक कैलेंडर जारी किया जाता है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रक्रियाएं पारदर्शी तरीके से संचालित हो रही हैं। उन्होंने 2017 के बाद 47 हजार नियुक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था का भी पालन किया गया है।
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इसके बावजूद विपक्षी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए और सदन में हंगामा शुरू हो गया। शोर-शराबे के कारण कार्यवाही बाधित हुई और माहौल तनावपूर्ण बन गया।
इससे पहले उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर विकास कार्यों को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
बेरोजगारी का यह मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। आने वाले दिनों में इस विषय पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।