उत्तर प्रदेश के कई जिलों में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब 19 कचहरियों को बम से उड़ाने की धमकी वाला ईमेल सामने आया। लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी सहित विभिन्न जिलों में प्रशासन ने तत्काल सतर्कता बरतते हुए कचहरी परिसरों को खाली कराना शुरू कर दिया।
धमकी भरे मेल में दोपहर के समय विस्फोट की बात कही गई थी, जिसके बाद अदालत परिसरों में चल रही कार्यवाही रोक दी गई। वकील, मुवक्किल और कर्मचारी जल्दबाजी में बाहर निकले। सुरक्षा के मद्देनजर सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
लखनऊ सिविल कोर्ट में एलआईयू, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमें सर्च ऑपरेशन में जुट गईं। हर कमरे, रिकॉर्ड रूम, पार्किंग क्षेत्र और सार्वजनिक स्थानों की जांच की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है और हर सूचना को गंभीरता से लिया जा रहा है।
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अयोध्या में भी पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया। न्यायिक अधिकारियों की देखरेख में पूरे परिसर को खाली कराया गया। लोगों से संयम बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की गई। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिक जांच में अभी तक कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली है, लेकिन जांच जारी है।
साइबर विशेषज्ञ ईमेल की उत्पत्ति का पता लगाने में लगे हैं। यह जांच की जा रही है कि मेल किसी शरारती तत्व ने भेजा या इसके पीछे कोई संगठित साजिश है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तकनीकी विश्लेषण के आधार पर जल्द ही आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जाएगी।
इस घटना ने न्यायालय परिसरों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल माध्यम से मिलने वाली धमकियों से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत है। फिलहाल प्रदेश भर में अलर्ट जारी है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए हैं।