हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तेलंगाना के निजामाबाद में एक चुनावी रैली के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत में मुस्लिम आबादी कभी भी हिंदू आबादी से अधिक नहीं होगी। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में जनसंख्या, धर्म और डेमोग्राफी को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। ओवैसी ने अपने भाषण में न केवल जनसंख्या के आंकड़ों का जिक्र किया, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए।
प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का हवाला
रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्होंने हाल ही में राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण सुना, जिसमें पीएम ने कहा था कि जहां दुनिया की आबादी बूढ़ी हो रही है, वहीं भारत की आबादी युवा बनी हुई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने सवाल उठाया कि देश की करीब 60 प्रतिशत आबादी 40 वर्ष से कम उम्र की है, लेकिन सरकार ने उनके रोजगार और कौशल विकास के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं।
जनसंख्या को लेकर डर फैलाने का आरोप
ओवैसी ने कहा कि बार-बार यह नैरेटिव गढ़ा जाता है कि मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि मुस्लिम आबादी भी स्थिरता की ओर बढ़ रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में मुसलमानों की संख्या कभी भी हिंदुओं से अधिक नहीं होगी। उनके अनुसार, आने वाले 20–25 वर्षों में भारत की युवा आबादी भी बुजुर्ग हो जाएगी और तब महंगाई, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे ज्यादा गंभीर होंगे।
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RSS प्रमुख के बयान पर तंज
AIMIM प्रमुख ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के तीन बच्चों वाले बयान का भी जिक्र किया और कहा कि पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून की बात की जाती थी और मुसलमानों को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब वही लोग अधिक जनसंख्या की जरूरत की बात कर रहे हैं। ओवैसी ने कहा कि जब आबादी बूढ़ी होगी, तब सरकारों को इसके दुष्परिणाम समझ में आएंगे।
विदेश नीति और खेल पर भी टिप्पणी
ओवैसी ने पाकिस्तान द्वारा टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच न खेलने के बयान पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत मेजबान देश है तो पाकिस्तान को स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए था। इसके अलावा उन्होंने चीन के सीमा विवाद को लेकर भी केंद्र सरकार पर चुप रहने का आरोप लगाया।
राजनीतिक संदेश साफ
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह बयान मुस्लिम आबादी को लेकर फैलाए जा रहे डर को खारिज करने और युवाओं के असली मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की रणनीति का हिस्सा है।